Saturday, May 16, 2026

सच सबके सामने,फिर भी साबित करने की मजबूरी

 सन्दर्भ-भोजशाला प्रकरण 


-तुषार कोठारी


सच सबके सामने हो लेकिन फिर भी इसे साबित करने की मजबूरी हो,तो ऐसा सिर्फ भारत में ही हो सकता है। धर्म के नाम पर देश का बंटवारा हो चुकने के बाद भी इश्वर अल्ला तेरो नाम के स्वप्नलोक में जीने वाले हमारे कल्पनाजीवी नेताओं ने देश को इसी तरह के रास्ते पर ले जाने की कोशिश की थी और इसी का नतीजा है कि खुली आंखों से नजर आने वाले सच को भी साबित करने की मजबूरी खडी कर दी जाती है।



पांच राज्यों के चुनाव नतीजों का निष्कर्ष - प्रासंगिकता खोती जा रही है विपक्षी पार्टियां

 - तुषार कोठारी 

पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के विश्लेषण से कई नए सवाल सामने आ रहे हैैं। इनमें सबसे बडा सवाल यही है कि क्या भारत के लोकतंत्र में विपक्षी दल अपनी प्रासंगिकता खोते जा रहे हैैं। क्या भविष्य की  राजनीति विपक्ष विहीन होने वाली है? इस तरह के सवाल कुछेक विपक्षी नेता भी उठा रहे हैैं,लेकिन गहराई से देखा जाए तो इस तरह की परिस्थितियां विपक्षी नेताओं की वजह से ही बन रही है।