सन्दर्भ-भोजशाला प्रकरण
-तुषार कोठारी
सच सबके सामने हो लेकिन फिर भी इसे साबित करने की मजबूरी हो,तो ऐसा सिर्फ भारत में ही हो सकता है। धर्म के नाम पर देश का बंटवारा हो चुकने के बाद भी इश्वर अल्ला तेरो नाम के स्वप्नलोक में जीने वाले हमारे कल्पनाजीवी नेताओं ने देश को इसी तरह के रास्ते पर ले जाने की कोशिश की थी और इसी का नतीजा है कि खुली आंखों से नजर आने वाले सच को भी साबित करने की मजबूरी खडी कर दी जाती है।










