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14 जून रविवार (सुबह 7.00)
आरामपुर फारेस्ट रेस्ट हाउस,धरियावाड रेंज (सीता माता अभयारण्य)
सुबह हो चुकी है। इस वन विश्रान्ति गृह के बाहर चारो ओर वैसे तो शांति है,लेकिन जंगल अपनी भाषा बोल रहा है। चिडियों की चहचहाट हैं,तो दूर कहीं किसी अन्य परिन्दे की बोली सुनाई दे रही है। अलग अलग तरह की ध्वनियां आ रही है,जिन्हे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता,सिर्फ सुना और महसूस किया जा सकता है। ठण्डी हवा बह रही है। बंदर पेडों पर कूद फान्द रहे हैं। एक काला कुत्ता इधर उधर डोल रहा है। अभी उसे पास बुलाकर मैने उससे परिचय किया है।













