Saturday, December 27, 2025

नेपाल यात्रा-4 पोखरा के सारंगकोट का सूर्योदय,जो हम नहीं देख पाए

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15 नवंबर 24 शुक्रवार प्रात: 8.55

होटल सी-लेक पोखरा


आज पोखरा से हमें निकलना है। इस वक्त हम निकलने के लिए तैयार हो रहे हैं। यहां से हम काठमाण्डू जाएंगे,जो कि दो सौ किमी दूर है। वहां पंहुचने में हमे करीब 8 घण्टे लगेंगे। हमें कहा गया है कि सुबह जल्दी निकलना होगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्दी तैयार हो जाएं।


15 नवंबर 24 शुक्रवार (रात 11.45)

होटल रामेश्वरम काठमाण्डू (नेपाल)


मैं इस वक्त नेपाल की राजधानी काठमाण्डू में पशुपतिनाथ मन्दिर के बिलकुल नजदीक रामेश्वरम होटल में हूं।


16 नवंबर 24 शनिवार सुबह 6.00

होटल रामेश्वरम काठमाण्डू

हमें जल्दी दर्शन करने जाना है,इसलिए मैं जाग चुका हूं और नित्यकर्म से निवृत्त हो चुका हूं। रात को काफी देर हो गई थी,इसलिए डायरी नहीं लिख पाया था। इस वक्त भी ज्यादा समय नहीं है। लेकिन फिलहाल बाथरुम बिजी है और इस खाली वक्त में मैं डायरी लिख रहा हूं।


बात 14 नवंबर की,जब हम पोखरा में थे और सुबह 4.30 बजे उठकर पोखरा का सूर्योदय देखने के लिए निकलने वाले थे। रात को हमसे कहा गया था कि पोखरा का सूर्योदय बडा ही सुन्दर होता है,लेकिन इसके लिए सुबह जल्दी निकलना होगा। मेरा सुबह जल्दी उठने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन बहुत ज्यादा दबाव डाला गया। कहा गया कि सिर्फ आधे घण्टे की बात है।


मैने भी सोचा कि चलो एकाध घण्टे के लिए सुबह जल्दी उठ जाता हूं। सुबह सिर्फ मुंह पर पानी के छींटे मारे और चल पडा,बाकी लोगों के साथ सूर्योदय देखने। सनराईज पाइन्ट पर समय रहते पंहुच गए। इसे सारंग कोट कहा जाता है। नेपाल की कई उंची चोटियां यहां से देखी जा सकती हैं। सारंग कोट पंहुच कर गाडी खडी करके काफी उंचाई तक पैदल जाना था। मैं चल पडा। काफी उपर जाकर एक बडा वाच टावर बनाया गया है। सौ डेढ सौ सीढियां चढ कर मैं वाच टावर के उपर भी पंहुच गया। इस वक्त 5.45 हो रहे थे। मैने गूगल पर सनराईज टाइम देखा,तो पता चला कि आज सूर्योदय 6.31 पर होगा। अभी 45 मिनट इंतजार करना था। मौसम काफी ठण्डा हो रहा था। मैं पैरों में स्लीपर और सिर्फ एक शर्ट पहन कर वहां पंहुचा था। ठण्ड महसूस हो रही थी,लेकिन कोई चारा नहीं था। ठण्ड के साथ में सूर्योदय का इंतजार करता रहा। लेकिन अचानक से आसमान पर बादलों ने कब्जा जमा लिया। सूर्यदेव को बादलों ने ढंक दिया। सूर्योदय का समय भी हो गया। लेकिन आसमान में सिर्फ बादल थे,सूरज नदारद था। हम वापस लौटने को हुए। मुझे लगा था कि अब हम सीधे होटल जाएंगे। गाडी में बैठने पर पता लगा कि हमारी नेपाली होस्ट उषा जी के किसी रिश्तेदार के घर पर ही नाश्ते की व्यवस्था है। पहले वहां जाएंगे,नाश्ता करेंगे और तब होटल लौटेंगे।


मैने तो मुंह भी नहीं धोया था। करीब तीन घण्टे रिश्तेदारी का मिलन चला। मैं भीतर भी नहीं गया। गाडी में ही सोता रहा। मेरा मूड और पेट दोनो खराब हो रहे थे। मैं बिना फ्रैश हुए चला गया था। लेकिन मेरे पास इंतजार करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। ना तो सूर्योदय देखने को मिला और उपर से सुबह भी खराब हो गई। खैर दस बजे हम होटल पर वापस लौटे। वापस लौट कर तैयार होते होते ग्यारह बज गए। आज का दिन पोखना घूमना था।  पोखरा भ्रमण की शुरुआत तो सुबह ही हो गई थी.......


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