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16 नवंबर 2024
विश्व विख्यात पशुपतिनाथ मन्दिर होटल के बिलकुल सामने ही था। सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर मन्दिर के दर्शनों के लिए चले।
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16 नवंबर 2024
विश्व विख्यात पशुपतिनाथ मन्दिर होटल के बिलकुल सामने ही था। सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर मन्दिर के दर्शनों के लिए चले।
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15 नवंबर-
पोखरा का दूसरा दिन। आज हमें विन्ध्य वासिनी देवी के दर्शन करके काठमाण्डू पंहुचना था। सुबह जल्दी उठकर निकलने की योजना थी। करीब नौ बजे होटल से निकले। विन्ध्य वासिनी पोखरा का प्रसिध्द धर्मस्थल है। एक विन्ध्य वासिनी हमारे मध्यप्रदेश में मैहर माता के रुप में मौजूद है,दूसरी यहां है।
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18 नवंबर 24 सोमवार (रात 8.00 बजे)
गौहाटी ओखा द्वारका एक्सप्रेस (कोच बी-2-17,18)
हमारी ट्रेन अब हमारे घर की दिशा में तेजी से दौड रही है और 20 नवंबर की सुबह हम रतलाम में होंगे। पूरे सफर में ट्रेन के डिब्बे में ही सबसे ज्यादा खाली वक्त मिल रहा है। शायद ये ऐसी पहली यात्रा थी,जिसमें डायरी बहुत कम लिख पाया। बेहद अस्तव्यस्त यात्रा के चलते डायरी लिखने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं मिल पाया। इसलिए अब ट्रेन में चलने के दौरान ही सबकुछ लिखना है।
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15 नवंबर 24 शुक्रवार प्रात: 8.55
होटल सी-लेक पोखरा
आज पोखरा से हमें निकलना है। इस वक्त हम निकलने के लिए तैयार हो रहे हैं। यहां से हम काठमाण्डू जाएंगे,जो कि दो सौ किमी दूर है। वहां पंहुचने में हमे करीब 8 घण्टे लगेंगे। हमें कहा गया है कि सुबह जल्दी निकलना होगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्दी तैयार हो जाएं।
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13 नवंबर 24 बुधवार
सुबह आठ बजे होटल के नीचे एक छोटे हाल में साहित्य संगम का कार्यक्रम शुरु हो गया। मैं साढे आठ पर तैयार होकर नीचे पंहुचा। रीता जी पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी नामक संस्था असम के तेजपुर में चलाती है। सारी योजना उन्ही की थी। चितवन के एक डेढ दर्जन साहित्यकार इस कार्यक्रम में मौजूद थे। स्वागत सत्कार के बाद भारत से गए हम छ: लोगों में से मुझे छोडकर सभी ने अपनी रचनाएं सुनाई। इसके बाद नेपाली साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं सुनाई। करीब दो घण्टे यह आयोजन चला। नेपाल के कई साहित्यकार हिन्दी में भी लिखते हैं। हमें भी कई पुस्तकें और प्रमाणपत्र भेंट किए गए।
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13 नवंबर 24 बुधवार (रात 8.00 आईएसटी)
होटल सी लेक पोखरा
दो दिन पहले ट्रेन में डायरी लिख रहा था,तब न्यू जलपाईगुडी नहीं पंहुचे थे। तब से लेकर आज अभी तक डायरी लिखने का मौका ही नहीं मिल पाया। आझ पोखरा पहुच कर अब डायरी लिखने का मौका मिला है। अब पूरे दो दिनों का लम्बी कहानी है,बल्कि तीन दिनों की।
(9 नवंबर 2024 से 20 नवंबर 2024)
11 नवंबर 24 सोमवार (दोपहर 12.45)
पटना-न्यू बरौनी स्टेशन के बीच
कोच न. बी-1-20 गांधीधाम-कामाख्या एक्सप्रेस
हमारी यह यात्रा शनिवार,रविवार की मध्यरात्रि 3 बजे (तारीख हो चुकी थी 10 नवंबर) रतलाम रेलवे स्टेशन से शुरु हुई। इस यात्रा में मैं और वैदेही भारत और नेपाल के कुछ साहित्यकारों द्वारा आयोजित की गई साहित्यिक यात्रा में भाग लेने के लिए नेपाल जा रहे है। ट्रेन से हम आज रात नौ बजे तक न्यू जलपाईगुडी (प.बंगाल) रेलवे स्टेशन पंहुचेंगे और वहां से फिर सडक़ मार्ग से नेपाल की छ: दिवसीय यात्रा पर निकलेंगे। मेरी यह यात्रा पिछली यात्रा के ठीक 110 दिनों के बाद हो रही है। इस 110 दिनों में काफी कुछ बदल गया है।