Monday, June 15, 2026

यात्रा वृत्तान्त-48/ सोमनाथ महादेव और दीव की यात्रा (मंगलवार 16 सितम्बर 2025 से 20 सितम्बर 2025 )

16 सितम्बर 2025 मंगलवार

रात 9.30- भावनगर से पहले


इस बार की ये यात्रा कई मायनों में अनोखी है। यात्रा तो होना थी,किन्नर कैलास की और वह भी जुलाई के महीने में,लेकिन फिर जुलाई में अभिभाषक संघ के चुनावों की चर्चा शुरु हो गई और दशरथ जी ने चुनाव लडने का मन बना लिया। फिर तय हुआ कि चुनाव निपटते ही किन्नर कैलास के लिए रवाना हो जाएंगे। चुनाव अगस्त की 23-24 को होना तय हुए। इसी दौरान,उत्तराखण्ड और देश भर में जबर्दस्त बारिश हो गई। किन्नर कैलास यात्रा ही रद्द हो गई। इधर मुझे स्वयं स्वास्थ्य की समस्याएं हो गई। उदर रोग ने महीने भर से अधिक कष्ट में रखा,तो कुल मिलाकर यात्रा की योजना रद्द हो गई। 


फिर ये विचार बना कि श्राध्द पक्ष में कहीं छोटी यात्रा कर ली जाए। धीरे धीरे द्वारका सोमनाथ और डीव की यात्रा का मन बन हगया। अब बात यात्रियों पर आई। मैं और प्रकाश तो बिलकुल तय थे। फिर आशुतोष भी राजी था,लेकिन दशरथ जी ने इंकार कर दिया। अब हम तीन रह गए। चौथे यात्री के रुप में नीलेश कटारिया ने रजामंदी दे दी। यात्रा की तारीख का मामला आशुतोष की वजह से उलझ रहा था। आखिरकार कल उसने भी साफ इंकार कर दिया।


आशुतोष के इंकार के बाद अब नया प्रश्न चौथे यात्री का था। मैने राजेश घोटीकर को फोन लगाया। राजेश की पहले तो इच्छा थी,लेकिन उसका वडोदरा का अपाइंटमेन्ट 19 तारीख का था। फिर उसने कहा कि मैं एपाइन्टमेन्ट चेंज करता हूं और कल का करता हूं। रात को जाकर ये तय हुआ कि घोटीकर जी को दोपहर तीन बजे से पहले वडोदरा पंहुच कर डाक्टटर से चैकअप कराना है। ये तय हुआ कि सुबह आठ बजे रतलाम से निकलेंगे।


4 लोग तय हो चुके थे। हम लोग सुबह आठ की बजाय साढे आठ पर रतलाम से निकल पाए।


रतलाम से निकलते ही धामनोद से एटलेन पर चढ गए। घर से केवल एक कप दूध पीकर आया था। भूख लग रही थी। नाश्ता करना था। थांदला में गांव के भीतर घुसे। एक दुकान पर गोटे बनवाए। गोटे बन ही रहे थे कि उससे पहले पोहे भी खा लिए। 


थांदला पंहुचने तक,मेरे पिछवाडे में दर्द शुरु हो चुका था,जो कि कल और परसों पूरी तरह नदारद हो चुका था। मुझे लगा कि मुझे बैठने के लिए कोई हार्ड सरफेस चाहिए। वहां से चले,आगे एक जगह सीएनजी डलवाने के लिए रुके तो मुझे ध्यान आया कि मैने एक नई डायरी रखी है। नई डायरी निकाली,उसे नीचे रखा,मेरा दर्द तकलीफ दूर हो गए और हम बडी आसानी से 1.45 पर वडोदरा पंहुच गए। घोटीकर जी का चैकअप कराने के लिए डाक्टर के अस्पताल में पंहुच गए। पता चला कि नम्बर 2.45 तक ओगा। हम निकले गोटे पकौडे और फाफडे खाने पंहुच गए। 


वहां से खा पी कर लौटे। 2.45 पर डाक्टर से मिले। चैकअप करवाया। अब हमारी यात्रा पूरी तरह शुरु हो रही थी। तुरंत वडोदरा से निकले। लक्ष्य तय किया सीधे दीव का। वहां से चले। बीच में एक होटल में तीन बजे भोजन किया और आखिरकार रात 9.00 बजे  यहां इस होटल में आकर रुके। अब कल यहां से सीधे डियू जाएंगे।


अब शुभ रात्रि.....। कल मिलते है।


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