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17 सितम्बर 25 बुधवार रात 22.22
अपना होटल दीव
कल हम भावनगर से पहले हाईवे पर होटल रायल रुम्स में रुके थे। आज सुबह करीब 10.00 बजे वहां से निकलने के लिए तैयार हो चुके थे। इसी दौरान,नीलेश ने आकर बताया कि यहां से 10-12 किमी दूरी पर निष्कलंक महादेव का मन्दिर है,जो कि अत्यन्त प्राचीन और जागृत मन्दिर है। उसे देखते हुए आगे बढना चाहिए।
सारे ही लोग वहां जाने को सहमत थे। इन्टरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि यह बेहद प्राचीन महाभारतकालीन मन्दिर है। कथा यह थी कि महाभारत के युध्द के बाद पाण्डवों को अपने पापों का शमन करना था। तब पाण्डवों ने श्रीकृष्ण से इस बारे में पूछा। श्रीकृष्ण ने पाण्डवों को एक काली गाय और एक काला झण्डा दिया। उन्होने कहा कि इन्हे लेकर जाओ और जिस स्थान पर इनका रंग काले से सफेद हो जाएगा,वहीं तुम्हारे पापों का शमन होगा। पाण्डव,काली गाय और काला झण्डा लेकर पूरे देश में घूमते रहे। आखिरकार इस स्थान पर आकर गाय और झण्डे का रंग बदल गया। वह काले से सफेद हो गया। इसी स्थान पर पाण्डवों ने निष्कलंक महादेव का मन्दिर बनाया।
अब इस मन्दिर की खासियत जानिए। यह मन्दिर समुद्र के बीच है। किनारे से करीब 1 किमी समुद्र के भीतर। इस मन्दिर में आप तभी जा सकते है,जब समुद्र भाटे की अवस्था में हो। जब समुद्र में ज्वार आता है,यह मन्दिर पूरा का पूरा पानी में डूब जाता है। केवल मन्दिर का ध्वज दिखाई देता है। ध्वज कभी नहीं डूबता। इस मन्दिर के दर्शन करने की शर्त यही है कि समुद्र ज्वार की स्थिति में नहीं बल्कि भाटे की स्थिति में उतरा हुआ हो।
अब ये कल्पना कीजिए कि इस मन्दिर का निर्माण कैसे हुए होगा? समुद्र के भीतर ज्वार भाटे का समय देखकर भी यदि आप कोई निर्माण करेंगे तो आपके द्वारा किया गया निर्माण कुछ ही घण्टों बाद के ज्वार से पूरी तरह धूल जाएगा। मान लीजिए आपने दीवार बनाई और मात्र 4 या 6 घण्टों के बाद ज्वार में यह पूरी दीवार पानी में डूब गई,तो पानी उतरने के बाद वह दीवार सलामत कैसे रहेगी? इसीलिए यह आज भी बडा चमत्कार है कि यह मन्दिर कैसे बना होगा?
हम,निष्कलंक महादेव मन्दिर के लिए निकलने वाले थे। होटल से निकले तो एक देसी दुकान पर खमण,गोटे और साग पुडी का ठेठ देसी नाश्ता किया। मजा आ गया। वहां से बढे,तो निष्कलंक महादेव करीब 33 किमी दूर था। हम करीब 11.30 पर वहां पंहुचे। मन्दिर पूरी तरह समुद्र में डूबा हुआ था,केवल ध्वजा नजर आ रही थी। इंटरनेट पर पता किया तो मालूम चला कि मन्दिर शाम 4.30 पर नजर आएगा। उस समय पानी उतरेगा। इतना समय हम रुक नहीं सकते थे। वहां से दीव 170 किमी था। अब हम दीव के लिए निकल पडे।
शानदार नेशनल हाईवे 6 लेन रोड। गूगल मैप पर डियू पंहुचने का समय 4 बजे का दिखाई दे रहा था। रास्ते में एक जगह रुक कर चाय पी। डियू में सरकारी रेस्ट हाउस में रुकने की कोशिश कर रहे थे। दीव के कलेक्टर आफिस में फोन किया। वहां से आरएच के इंचार्ज जगदीश यादव का नम्बर मिला। उसने कहा कि सरकारी रेस्ट हाउस प्राईवेट कम्पनियों को ठेके पर दे दिए है। केवल एक आरएच है,लेकिन वहां एसी नहीं है। हम सरकारी आरआच पंहुचे। लोकेशन पहुत अच्छी थी,लेकिन कमरों की व्यवस्था ठीक नहीं थी। वहां से दीव में प्रवेश किया।
दीव,असल में एक छोटा सा समुद्री टापू है,जो कि पुल के माध्यम से देश से जुडा है। 1761 में पुर्तगालियों ने यहां किले का निर्माण किया था। मात्र 40 वर्ग किमी आकार के इस टापू पर करीब 50 हजार लोग निवास करते हैं। दीव में पंहुचकर 2-3 जगह ढूंढने के बाद इस होटल में 1500 का एसी कमरा लिया। फिर घूमने निकले।
गाडी से नगाओ बीच पर पंहुचे। यह बीच मुख्य शहर से 3-4 किमी दूर है। इसके बीच में फुदम बर्ड सेंचुरी पडती है,जो कि समुद्र के पानी को भीतर लाकर मानव निर्मित एक छोटा सा वन बनाया गया है। कुछ देर फुदम बर्ड सेंचुरी में गुजारा और फिर नगाओ बीच पर पंहुचे।
ये अभी टूरिज्म का आफ सीजन है। थोडे से पर्यटक बीच पर मौजूद थे। वाटर स्पोर्ट्स अभी बन्द है,जो कि 1 अक्टूबर से चालू किए जाएंगे। इस बीच पर कुछ वक्त गुजार कर मुख्य शहर में वापस लौटे। डियू में इदर उधर घूमघाम कर,भोजन करने के लिए इसी होटल में आए। भोजन किया। अब सोने का समय है।
डियू फोर्ट और यहा का चर्च कल सुबह देखेंगे और फिर यहां से रवाना हो जाएंगे।
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