Monday, June 15, 2026

सोमनाथ दीव यात्रा-3 / नौसेना के पराक्रम दिखाताआईएनएस खुकरी और भव्य दिव्य सोमनाथ मन्दिर

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19 सितम्बर 2025 शुक्रवार सुबह 8.07

होटल अन्नपूर्णा,सासन गिर


इस वक्त हम देश के एकमात्र गिर राष्ट्रीय उद्यान के बफर झोन सासन में इस होटल में रुके हैं।  कल के दिन की व्यस्तता के चलते कल का घटनाक्रम दर्ज नहीं कर पाया था। इसलिए अब लिख रहा हूं।


कल की सुबह हम सभी लोग 9 बजे तक तैयार हो चुके थे। नाश्ता करने से पहले दीव किला देखने का निर्णय लिया। हमारी होटल जिस सडक़ पर थी,उसी सडक़ पर आगे जाकर डियू का किला मौजूद है। दीव का यह समुद्री किला पुर्तगालियों ने 1761 में बनवाया था। किली तीन तरफ से समुद्र से घिरा है और एक ओर जमीन से।  किले की प्राचीरें सुरक्षित है,लेकिन भीतर के अधिकांश भवन ध्वस्त हो चुके है।  एएसआई इन्हे फिर से पुराने स्वरुप में लाने की कोशिशों में जुटी है। किला काफी लम्बा चौडा हैै। किले के भीतर जेल और कुछ इमारतें है जिन्हे प्रशासनिक और आवासीय उपयोग में लाया जाता था। किले की समुद्र की तरफ वाली प्राचीरों पर तोपें लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। ये तोपें अब भी रखी हुई है। किले का सबसे उपरी भाग लाइट हाउस है,जिस पर लाइट जलाई जाती थी,ताकि रात के वक्त जहाजों को दिशा ज्ञान मिल सके। लाइट हाउस वाले सबसे उपरी हिस्से में भी तोपें लगाई गई हैं।


यहां प्रवेश शुल्क सौ रुपए है। करीब एक घण्टे हम किले पर घूमे। यहां पर्यटकों को घुमाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन भी है,जो किले का चक्कर लगवाते है। हम तो पैदल ही घूम रहे थे और विडीयो बना रहे थे।


किले से बाहर आए। किले से हमारे होटल के रास्ते के बीच में एक स्थान पर नौसेना का युध्दक जहाज खुकरी खडा किया गया है। इसे अब संग्रहालय बना दिया गया है। इसका भी सौ रु. का टिकट है। टिकट लेकर खुकरी पर पंहुचे। खुकरी का इतिहास यह है कि 1971 के युध्द में खुकरी ने कराची फोर्ट पर बमबारी करके तबाह कर दिया था। इस सफल हमले के बाद लौटते समय डियू से करीब 40 नाटिकल मील यानी करीब 70 किमी दूर पाकिस्तान की एक बारुदी सुरंग के कारण खुकरी समुद्र में डूब गया और जहाज पर सवार करीब 150 सैनिक और अफसरों का भी बलिदान हो गया। उसी खुकरी की याद में नया खुकरी बनाया गया जो 2019 तक सेवा में रहा फिर रिटायर्ड कर दिया गया। 2023 में इसे दीव लाकर संग्रहालय बना दिया गया। 


इस खुकरी पर 6 मिसाइले होती थी। आगे 165 मिमि की गन लगी है। जहाज छ: मंजिला है। डेक से तीन मंजिदल उपर और तीन मंजिल नीचे,जिसमें सबसे नीचे इंजिन व फ्यूल टैंक है। पर्यटकों को उपरी तीन मंजिलों का भ्रमण करवाया जाता है। भीतर जाकर पता चलता है कि जहाज पर जीवन कैसा होता है? जहाज का किचन,अफसरों और सैनिकों के रहने,सोने का स्थान। एक छोटा सा अस्पताल। फिर उपर की मंजिल पर ड्राइविंग और कमाण्ड सेन्टर,जहां जहाज का कैप्टन बैठकर जहाज की गति व दिशा तय करता है। खुकरी पर नौसेना के विभिन्न जहाजों और पनडुब्बियों की महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गई है। करीब एक घण्टा हमें यहां लगा। जहाज के उपरी कमाण्ड सेन्टर में टूरिज्म का एक कर्मचारी,पर्यटकों को जहाज का इतिहास बताता है। 


यहां से लौटते हुए करीब 12 बज गए थे। हम दीव मेें थे,इसलिए भोजन से पहले कोल्डड्रिंक लिया,फिर उसी अपना होटल में भोजन किया,जहां हम रुके थे। यहां की वाइन शाप आज खुली नहीं थी,पता चला कि गुरुवार को इसका वीकली आफ होता है। हम डियू से टाटा करके निकल गए। हमारी मंजिल अब सोमनाथ थी।


शाम करीब 4.30 पर हम सोमनाथ पंहुच गए। यहां बिलकुल भीडभाड नहीं थी। बडे आराम से इस भव्य और दिव्य मन्दिर में महादेव के दर्शन किए। कई आक्रमण झेल चुका सोमनाथ मन्दिर अब पूरी भव्यता के साथ खडा है। मंदिर में प्रवेश करते ही मन में अलौकिक अनुभूति होती है। मेरी तो आंखे भर आई। काफी देर तक वहां ध्यान किया। प्रसाद लिया। फिर निकले,तो त्रिवेणी संगम पंहुचे जहां तीन नदियों का संगम होकर ये समुद्र में मिल जाती है। यहां चाय नाश्ता करके अब निकले सासन गिर के लिए।


घोटीकर जी का सुझाव था कि गिर के बफर झोन में घूमने का अनुभव ले लिया जाए। पार्क इस वक्त बन्द है। इसी योजना के तहतयहां सासन गिर पंहुचे और अन्नपूर्णा होटल में रुक गए। 

रात को भोजन के लिए यहां से करीब दो किमी पीछे एक ढाबे पर पंहुचे,जहां अत्यन्त स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध था। वहां से लौटे तो पता चला कि प्रकाश पंवार सा. अपना मोबाइल वहीं भूल आए हैं। फिर वहां लौटे,ढाबा संचालक डूंगरसिंह राजस्थान से है। वे मोबाइल लेकर ही खडे थे। मोबाइल लेकर लौटे। इस वक्त आधी रात हो चुकी थी। आते ही नींद के हवाले हो गए। 


इस वक्त सभी तैयार हो रहे है और कुछ ही देर में यहां से निकलने की तैयारी है। पहले यहां से द्वारका जाने की योजना थी,लेकिन रात को चर्चा में तय हुआ कि समय कम है,इसलिए द्वारका को रद्द करते हुए यहीं से अहमदाबाद होते हुए रतलाम निकलेंगे। 

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