सीता माता वन्यजीव अभयारण्य की यात्रा 13-14 जून 2026
13 जून शनिवार रात 11.30
आरामपुर अभयारण्य
इस वक्त मैं धरियावाद राजस्थान के आरामपुर फारेस्ट रेस्ट हाउस में हूं और सीता माता वन्य जीव अभयारण्य घूम कर आया हूं।
आज के दिन की शुरुआत सुबह 9.15 पर हुई जब मलय और ध्रुपद कार लेकर घर पंहुचे थे। इस यात्रा का आयोजन करीब बीस दिन पहले तब हुआ,जब विवाह की वर्षगांठ 4 जून को हम कहीं घूमने नहीं जा पाए थे। वैदेही ने कहा कि कम से कम एक दो दिन के लिए ही सही,कहीं घूमने चलो। मैने कहा,मैं ऐसा स्थान ढूंढता हूं,जहां एक दो दिन में घूम कर आया जा सकता हो।
संयोग से नीरज सक्सेना ने बताया कि उनका कोई साथी ऐसे स्थान पर जाकर आया है,जहां जून के महीने में भी नदी में पानी बह रहा है और वह स्थान ज्यादा दूर भी नहीं है। मैने ढूंढा पूछताछ की,पता किया तो मालूम हुआ कि यह सीता माता वन्य जीव अभयारण्य है।
यहां आने की योजना में मैं,वैदेही,चिन्तन और मलय शामिल थे,लेकिन आखरी समय में चिन्तन ने मना कर दिया कि वह नहीं आ पाएगा। फिर हाथो हाथ ध्रुपद को तैयार किया। अब हम चार लोग यहां आए है।
सबिह नौ बजे रतलाम से निकलना तय किया था। मैं स्नानादि से निवृत्त होकर ठीक नौै बजे तैयार हो गया। अभी वैदेही को तैयार होना बाकी था। लेकिन मलय और ध्रुपद 9.45 पर आए। अब यात्रा शुरु हुई।
रतलाम से सैलाना,पिपलौदा,दलोठ,अरनोद,प्रतापगढ होते हुए यहां पंहुचना था। प्रतापगढ से धरियावाद और वहां से आरामपुर। आरामपुर के फारेस्ट रेंज आफिसर सामेरा राम जी बात हो चुकी थी। आरामपुर का फारेस्ट रेस्ट हाउस बुक हो चुका था।
रतलाम से चले,10.15 पर। रास्ते में प्रतापगढ में रुक कर एक छोटे से होटल में भोजन किया। पूरा रास्ता बेहतरीन। कहीं कोई दिक्कत नहीं। आजकल रास्ते बढिया हो चुके है।प्रतापगढ में भोजन करके आगे बढे। पौने तीन बजे आरामपुर रेस्ट हाउस आ गए। हमारे लिए दो कमरे खोल दिए गए,कमरो की चाबी दे दी गई। यहां तैनात वनरक्षक एजाज से पूछताछ में पता चला कि यहां से करीब 25 किमी की दूरी पर सीता माता अभयारण्य का मेन गेट डमडमा गेट है। सारे व्यू पाइंट इसी के भीतर है। शाम होने से पहले हम सबकुछ देख सकते है।
हम फौरन चल पडे। सीता माता अभयारण्य अपने आप में अनूठा है। पूरे भारत में कहीं नहीं सिर्फ यहीं उडन गिलहरियां पाई जाती है। ये उडन गिलहरियां सूरज ढलने के बाद ही बाहर निकलती है।
हम चल पडे। सीता माता अभयारण्य के मेन गेट की ओर। उस स्थान को देखने,जहां सीता मैया,धरती माता की गोद में समाई थी।
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