Monday, June 15, 2026

गोवा यात्रा-2/ पणजी की महालक्ष्मी और राधाकृष्ण के दर्शन

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27 नवंबर शाम 4.45

होटल वैलनकन्नी (रुम जी-4)

इस वक्त हम दिनभर घूम घाम कर फिर से होटल में आराम कर रहे हैं। आज सुबह करीब 10 बजे होटल में पोहे ब्रेड बटर का नाश्ता करके करीब 11 बजे निकले थे। होटल में ही रेंटल स्कूटर आ गया था। 500 रु. प्रतिदिन के किराये पर तीन दिन के लिए स्कूटर लिया है। सुबह ही विजू का फोन आ गया था कि वह 11.30 पर उसके आफिस में पंहुच जाएगा। इसलिए सबसे पहले पंजिम(पणजी) में उसके आफिस जाने का ही इरादा बनाया। इस बीच रत्नागिरी में महेश जी से चर्चा हो गई और यह तय हो गया कि रत्नागिरी 1 दिसम्बर को ही सुबह जाएंगे और वहीं से ट्रेन में सवार होंगे। 


करीब 11.15 पर होटल से निकले। सबसे पहले पणजी में विजू के आफिस गोमान्तक पर पंहुचे। गोमान्तक,गोवा का काफी पुराना अखबार है,जिसे अब महाराष्ट्र के सकाळ ग्रुप ने ले लिया है। विजू गोमान्तक में सीजीएम है।


विजू के आफिस में काफी पीते पीते यह तय हुआ कि कल होटल बदल लेंगे। अब हम भी उसी होटल में चले जाएंगे,जहां चिंतन रुका हुआ है। यह होटल पणजी के मुख्य बाजार में ही है। पणजी के इस होटल में हमने 28 और 29 दिसम्बर के लिए कमरा बुक कर लिया। 


इसी होटल के सामने श्री महालक्ष्मी मंदिर और राधाकृष्ण मन्दिर है। इन मन्दिरों के दर्शन किए और विडीयो भी बनाया। 


असल में अभी तक अधिकांश लोग गोवा को  यहां के समुद्र तटों,इसाईयों के चर्चों, बीच पर स्विम सूट में घूमती स्वच्छन्द महिलाओं और 

शराब के लिए ही जानते है। बहुत कम लोगों को गोवा के विशाल धर्मस्थलों,प्राचीन मन्दिरों और उंची धार्मिक विरासत और परम्पराओं की जानकारी है। 


पुर्तगालियों के हमले से पहले गोवा का नाम गोमान्तक था। गोमान्तक का अर्थ है,जहां जिस स्थान पर गाय विचरण करती है,वह भूमि या स्वर्ग जैसी भूमि। गोमान्तक में हजारों विशाल मन्दिर और आश्रम हुआ करते थे। पुर्तगाली इसाईयों ने आक्रमण किए। मन्दिरों को तोड कर चर्च बना दिए। लेकिन इसके बावजूद कई सारे मन्दिर बचा लिए गए।


इनमें श्री शांतादुर्गा,मंगेश,श्री महालक्ष्मी मन्दिर जैसे प्रमुख मन्दिर है। इस बार हमने यही तय किया है कि हम धार्मिक स्थलों पर ही भ्रमण करेंगे और उनके विडीयो बनाएंगे।


श्री महालक्ष्मी मन्दिर के दर्शनों के बाद हमने सोचा कि भोजन करने के लिए पणजी से कुछ दूर चला जाए। पणजी में समुद्र के साथ चलने वाली सडक़,पहले मिरामार बीच पंहुचती है और फिर डोनापाला बीच। डोनापाला बीच वही बीच है जहां सिंघम के अजय देवगन ने बिजली का खंभा उखाडा था और चिंतन ने बचपन में अपनी एक चप्पल गंवा दी थी। डोनापाला तक गए। लौटते समय एक पंजाबी होटल में भोजन किया और करीब साढे चार बजे होटल में लौट आए। तभी से आराम कर रहे थे। अब बाहर जाने का इरादा है।

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