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29 नवंबर 2025 शनिवार
विजू,आज शाम 7.00 बजे तक अपनी ट्रेनिंग में व्यस्त है। इसलिए आज हमने साउथ गोवा में शांतादुर्गा,मंगेशी आदि मन्दिरों के दर्शन करने का कार्यक्रम बनाया था। चिंतन भी आज हमारे साथ आ गया था। हमने विजू की कार से जाने का तय किया था। सरिता और विराज भी हमारे साथ जाने वाले थे। पहले 10 बजे निकलने का सोचा था लेकिन सरिता भाभी का कहना था कि उन्हे थोडा ज्यादा वक्त लगेगा।
सुबह दस बजे हम पणजी के कामत होटल में नाश्ता करने पंहुचे। इस होटल में स्वादिष्ट शाकाहारी भोजन मिलता है। कामत होटल में डोसा आदि का नाश्ता किया। इस दौरान ग्याहर बज गए। अब मैं और चिंतन स्कूटर से पोरवोरिम में विजू के घर पंहुचे जोकि करीब 7 किमी दूर था। पोरवोरिम में विजू के घर पर सरिता भाभी और विराज तैयार खडे थे। हम कार में सवार हुए। चिंतन स्कूटर से ही वापस लौटने वाला था। हम लोग कुछ ही देर में फिर से होटल पंहुच गए। अब साउथ गोवा के लिए निकलने का वक्त था। शांतादुर्गा मन्दिर यहां से करीब 30 किमी दूर था।गाडी अब चिंतन ड्राइव कर रहा था। गोवा की सडक़े शानदार है। हम करीब सवा घण्टे में कवळे के शांतादुर्गा मन्दिर में पंहुच गए।
कवळे का शांतादुर्गा मन्दिर अत्यन्त विशाल मन्दिर है। मंदिर के बाहर आयाकार विशाल सरोवर है। भीतर परिसर के बीच में मन्दिर स्थित थे,जबकि परकोटे के तीनो तरफ आवासीय भवन है,जहां देश भर से आने वाले श्रध्दालुओं के ठहरने की व्यवस्था है। मन्दिर कमेटी का दफ्तर भी इन्ही भवनों में मंदिर के दाई ओर है,जबकि बाई ओर मन्दिर का केन्टीन है।
श्री शांतादुर्गा मन्दिर का इतिहास गोवा में पुर्तगाली आक्रमण से जुडा है। श्री शांतादुर्गा का वास्तविक मन्दिर केलोशी नामक गांव में था। पुर्तगाली ईसाई जब मन्दिरों को ध्वस्त कर रहे थे,तब शांतादुर्गा के भक्त,देवी की प्रतिमा को लेकर वहां से भागे और जिस स्थान पर अभी श्री शांतादुर्गा विराजित है,उस स्थान यानी फोण्डा के कवळे गांव में आए। यहां इस स्थान पर एक कच्चे घर में माता को स्थापित किया गया। बाद में 1730 में वर्तमान मन्दिर का निर्माण शुरु हुआ,जो आठ वर्षों तक चला। 1738 में इसका निर्माण पूरा हुआ। बाद में 1739 में छत्रपति साहू महाराज ने यह कवळे गांव मन्दिर को दे दिया। इसके बाद मन्दिर का समय समय पर जीर्णोध्दार होता रहा। आखरी जीर्णोध्दार वर्ष 1965 में किया गया।
श्री शांतादुर्गा को शांति और समृध्दि की देवी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि एक बार विष्णु और महादेव में विवाद हुआ तो शांतादुर्गा ने उनके बीच मध्यस्थता करके शांति स्थापित की थी। इसीलिए उनका नाम श्री शांतादुर्गा पडा।
मन्दिर के दर्शनों के बाद यहीं के केन्टीन में हम सभी ने भोजन किया। मुझे मन्दिर समिति के पदाधिकाारियों से मिलना था,लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। काफी इंतजार के बाद,हम यहां से निकल गए। यहीं से डेढ किमी की दूरी पर महालक्ष्मी(महालसा) देवी का मन्दिर है। यह भी इसी तरह का विशाल मन्दिर है,जहां बीच में मन्दिर और तीन तरफ आवासीय भवन है।
महालक्ष्मी मन्दिर के दर्शन के बाद यहां के केन्टीन में हम सभी ने चाय पी। अब घडी में 4.00 का वक्त हो गया था। विजू ने शाम 6 बजे तक फ्री हो जाने की बात कही थी,इसलिए हमने यहां से सीधे मंगेशी जाने का फैसला किया,ताकि हम छ: बजे तक पणजी पंहुच सके। मंगेशी मन्दिर महादेव का मन्दिर है। यह भी अत्यन्त विशाल और सुन्दर मन्दिर है। इसका इतिहास भी उसी तरह का है। यहां दर्शन किए,विडीयो आदि बनाए। मगेंश मन्दिर के पास तक गाडी नहीं जाती है। गाडी को काफी दूर खडा करना पडता है और पार्किंग से मन्दिर तक पैदल जाना पडता है।
मन्दिर के दर्शन के बाद यहां भी विडीयो बनाया और वहां से पार्किंग तक लौटे। पार्किंग पर एक चाय की गुमटी में चाय पी। इसी बीच मन्दिर से पार्किंग तक आने के दौरान वैदेही को एलर्जी की वजह से खांसी चलने लगी। जबर्दस्त खांसी। उसकी हालत खराब होने लगी। इसी समय विजू का फोन आ गया। मैने कहा कि हम सात बजे तक पणजी पंहुच जाएंगे। गाडी चिंतन ही चला रहा था। पणजी के नजदीक तो हम 7.15 तक आ गए थे,लेकिन यहां गलत रास्ता लेकर माण्डोवी नके ब्रिज पर चढ गए। फिर पूरा ब्रिज पार कर उसी ब्रिज से वापस लौटे और फिर सही रास्ता पकड कर होटल पंहुचे।। अब 7.45 हो चुके थे। विजू को फोन किया। उसने 15 मिनट में होटल आने की बात कही थी,लेकिन फिर वो,भाभी और विराज उसके आफिस व्हीकल से घर के लिए निकल गए। विजू का कहना था कि वह 9.00 बजे के करीब फोन करेगा और लोकेशन बताएगा। जहां हमे शाम को घूमने जाना है।
होटल में हम लोगों ने हाथ मुंह धोए,कपडे बदले और फिर से घूमने जाने को तैयार हो गए। करीब साढे नौ बजे विजू का फोन आया कि हमे माण्डवी ब्रिज पार करके मैजेस्टिक प्राइड कैसिनो में जाना है। लेकिन उसने कहा कि अब भाभी नहीं आ रही है,क्योकि वह थक गई है। मैने यह बात वैदेही को नहीं बताई। हम जब कैसिनो पंहुचे तो वैदेही विजू से लडने लगी कि भाभी क्यो नहीं आई? उसने कहा कि वो थक गई है। इसी विवाद के बीच हम कैसिनो के भीतर पंहुचे,लेकिन तभी अचानक विराज और भाभी दोनो प्रकट हो गए। ये हम सभी के लिए बडा सरप्राइज था। कैसिनो के भीतर पंहुचे। यहां से लौटते हुए रात के करीब दो बज गए थे।
शेखर जीजाजी (पाटिल सा.) ने शाम को बता दिया था कि रविवार को वे सुबह 8 बजे हमे लेने आ रहे हैं।
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