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22 सितम्बर 2025 सोमवार,दोपहर 2.40
इ खबरटुडे आफिस
हमारी यात्रा तो 20 सितम्बर की रात्रि को ही रतलाम वापसी के साथ समाप्त हो गई थी,लेकिन सासन गिर से अहमदाबाद और फिर वहां से रतलाम की यात्रा के बीच में इतना समय ही नहीं मिला कि यात्रा के अंतिम चरण की घटनाएं डायरी में दर्ज की जा सके। ये समय आज डायरी वापस मिलने के बाद मिल पाया है। डायरी भी प्रकाश की कार में ही छूट गई थी,जो आज मिली है। खैर..। अब बात वहां से,जहां से छोडी थी।
19 सितम्बर
अब सासन गिर के अन्नपूर्णा होटल से निकलने की तैयारी मे थे। रात को ही ये तय हो गया था कि नाश्ता डूंगरसिंह के ढाबे में करेंगे,जबां बीती रात भोजन किया था। डूंगरसिंह ने ये वादा भी किया था कि वह उसके ढाबे पर देखे गए शेरों के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल से बनाए विडीयो भी हमे दिखाएगा। हम करीब 9.30 पर उसके ढाबे पर पंहुचे। वहां शानदार नाश्ता करने के बाद लौटे। हमारे होटल के ठीक सामने गिर राष्ट्रीय उद्यान का पर्यटक सेवा केन्द्र व अन्य कार्यालय थे। इसी में गिर की सोवेनियर शाप भी थी। जहां अच्छी क्वालिटी के जैकेट टीशर्ट आदि उपलब्ध थे। हम चारों ने अपनी अपनी पसन्द की खरीददारी की। दोपहर करीब 12 बजे हम यहां से अहमदाबाद के लिए निकल पडे। अहमदाबाद में नीलेश को एक किराया एग्रीमेन्ट पर साइन करना था और इसके लिए शाम 7.00 बजे तक अहमदाबाद पंहुचना था।
अहमदाबाद यहां से 379 किमी दूर था और गूगल मैप सवा सात घण्टे का टाइम वहां पंहुचने के बता रहा था। हम तेजी से अहमदाबाद के लिए बढ चले। रास्ते में ही ब्लैक बक नेशनल पार्क भी पड गया। सारे नेशनल पार्क 15 अक्टूबर तक बंद रहते है। यह भी बन्द ही था,लेकिन इसके बफर झोन से गुजरने के दौरान काले हिरणों का एक बडा झुण्ड दिखाई दिया,जिसके विडीयो भी हमने बनाए।
रास्ते में ही मधुकर को फोन करके बताया कि हम आ रहे हैं। मधुकर ने कहा कि ठीक है। सभी लोग उसके फ्लैट पर ही रुकेंगे। हम शाम 7.30 पर अहमदाबाद में उस वकील के दफ्तर में पंहुच गए,जहां नीलेश को अग्रीमेन्ट साइन करना था। वहां से नीलेश का घर बिलकुल नजदीक था। नीलेश के घर पंहुचकर भाभी व बच्चो से मिले। प्रकाश की फरमाइश पर वहां भजिए बनाए गए थे। भजिए खाकर और चाय पीकर हम निकल पडे मधुकर के घर के लिए। मधुकर के घर का रास्ता मात्र 15 मिनट का था। हम
रात ठीक नौ बजे मधुकर के घर पंहुच गए।
मधुकर से दो तीन सालों के बाद मुलाकात हो रही थी। हम नीलेश को उसके घर ही छोड आए थे। मैं घोटीकर जी और पंवार सा.मधुकर के घर पंहुचे थे। मधुकर का बेटा आयुश नाइट शिफ्ट कर रहा था,इसलिए घर पर नहीं था। चार यार मिल गए थे और इसीलिए आधी रात के बाद तक यारों की महफिल चलती रही। हम लोग डेढ दो बजे बिस्तर के हवाले हुए।
20 सितम्बर
रात को दो बजे सोए तो सुबह नौ बजे तक सोते रहे। यह तय हुआ था कि नीलेश को उसके घर से लेना है,इसलिए नाश्ता उसके घर पर ही होगा। हम करीब पौने ग्यारह बजे उसके घर पंहुचे। वहां खमण ढोकले,जलेबी और आलू के पराठे का हेवी नाश्ता था,जो कहीं से भी भोजन से कम नहीं था। नाश्ता करके निकलने में करीब सवा बारह बज गए। आहमदाबाद से सीधे निकले तो शाम करीब चार बजे गोधरा में राजेश के एक मित्र के पास पंहुचे,जो गोधरा रेडक्रास सोसायटी में कार्यरत है। गोधरा रेडक्रास सोसायटी बहुत बडी ब्लडबैंक चलाती है। ये ब्लडबैंक देखी। यहां ब्लडबैंक में प्लाज्मा और प्लैटलैट्स सेपरेशन यूनिट भी है,जहां रक्त से इन्हे अलग किया जाता है। प्लाज्मा जरुरतमंदों को देने के अलावा कुछ कंपनियों को बेचा भी जाता है।
गोधरा से आगे बढे। एक्सप्रेस वे एटलेन पर चलकर रात करीब दस बजे रतलाम पंहुच गए। रतलाम में सबसे पहले नीलेश को घर छोडा,फिर इ कबरटुडे आफिस पर कुछ देर रुके। फिर राजेश और प्रकाश ने मुझे घर छोडा। इस वक्त ग्यारह बज चुके थे। वे मुझे छोडकर रवाना हो गए और इस तरह यह छोटी सी यात्रा पूरी हुई।
समाप्त।
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