Saturday, December 27, 2025

नेपाल यात्रा-2 खचाखच भरी गाडी और नेपाल का उबड खाबड महेन्द्र राजमार्ग

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13 नवंबर 24 बुधवार (रात 8.00 आईएसटी)

होटल सी लेक पोखरा 


दो दिन पहले ट्रेन में डायरी लिख रहा था,तब न्यू जलपाईगुडी नहीं पंहुचे थे। तब से लेकर आज अभी तक डायरी लिखने का मौका ही नहीं मिल पाया। आझ पोखरा पहुच कर अब डायरी लिखने का मौका मिला है। अब पूरे दो दिनों का लम्बी कहानी है,बल्कि तीन दिनों की।


11 नवंबर 

हमारी ट्रेन लेट होते होते आखिरकार 10.30 पर न्यू जलरपाईगुडी स्टेशन पंहुची। कार्यक्रम और यात्रा की होस्ट रीता जी खुद अभी एनजेपी नहीं पंहुच पाई थी। उन्होने बताया कि हमारा होटल सिलीगुडी में है और गुगल मैप के मुताबिक सिलीगुडी एनजेपी स्टेशन से महज  किमी दूर है। हमे होटल स्वस्तिक में जाना था। आटो वाले 6 किमी का छ:सौ मांग रहे थे। फिर एक हाथ रिक्शे वाला आया जो दो सौ रु. में ले जाने को राजी था। मेहनतकश की मदद हो जाएगी यही सोचकर हम उसी के साथ चल पडे। स्टेशन से करीब दो सौ मीटर आगे जाकर हाथ रिक्शा खडे थे। वहां पंहुच कर पता चला कि हमे तय करने वाला व्यक्ति तो दलाल था,वह खुद साइकिल रिक्शा नहीं खींचता था। उसने एक रिक्शे वाले को बुलाया।


वैदेही साइकिल रिक्शा में पहली बार बैठ रही थी।उसे डर भी लग रहा था। लेकिन हम साइकिल रिक्शा में सवार हुए। हमें स्वस्तिक होटल पंहुचने में करीब चालीस मिनट का वक्त लगा। 11.10 पर हम होटल के अपने कमरे में पंहुचे। पंहुचे ही थे कि एक सज्जन आकर हमसे मिले,वे भी हमारी ही तरह इस यात्रा में शामिल होने के लिए भोपाल से आए थे,नाम था तुमुल सिन्हा। प्रारंभिक परिचय हुआ। रीता जी को होटल पंहुचते पंहुचते रात के 12 बज गए थे। उन्होने आते ही बताया कि सुबह पांच बजे यहां से चल देना है। कुल मिलाकर डायरी लिखने का समय नहीं बचा था। जल्दी उठना था इसलिए सुबह साढे चार का अलार्म लगा कर सो गए। 


12 नवंबर मंगलवार

सुबह जल्दी निकलना था,इसलिए साढे चार बजे का अलार्म लगा कर सोए थे। जल्दी उटकर नहा धोकर निकलते निकलते भी साढे पांच बज गए थे,लेकिन मुझे देर नहीं हुई थी।अभी बाकी के लोग भी आ ही रहे थे।


अब मैने देखा कि हमारी यात्रा के लिए एक इनोवा आई थी। इन इनोवा में जाने वालों की संख्या देखकर मुझे थोडा डर लगा। यात्रा की आयोजक रीता सिंह और उनकी छोटी बहन,इसके अलावा अरुणाचल के तेजपुर से आई गुम्फी जी अपने बेटे के साथ,मैं और वैदेही और तुमुल सिन्हा जी और गाडी का ड्राइवर प्रदीप। तो इस तरह अभी कुल 8 लोग हो चुके थे। जब गाडी में बैठने की बात आई तो सबसे पहले मैने बडा दिल दिखाया और सबसे पीछे की सीट पर बैठने को राजी हो गया। मेरे साथ तुमुल सिन्हा जी भी पीछे आ गए।

अब हम बढ चले सिलीगुडी से नेपाल बार्डर काकर भिट्टा के लिए। सिलीगुडी से करीब 40 किमी पर नेपाल की सीमा है। नेपाल की सीमा पर पंहुचते ही वहां के इमिग्रेशन आफिस में पंहुचे। एक व्यक्ति हमारे पास आया,सभी समझे यह कोई सरकारी आदमी होगा। उसने हमे कब्जे में लिया और लेकर चला,सब औपचारिकताएं पूरी करने। पता चला वह एक एजेन्ट है। सबसे पहले वह हमें ले गया करेन्सी एक्सचेंज करने। भारतीय रुपए और नेपाली रुपए में अंतर है। भारत के सौ रुपए नेपाल के 160 रुपए होते है। हमने बारह हजार बदलवाए जो कि बीस हजार से कुछ अधिक हुए। मुद्रा बदल गई। फिर वो दलाल औपचारिकताएं पूरी करने ले गया। रीता सिंह जी जो दुपट्टे नेपाली साहित्यकारों को भेंट करने लाई थी,उस पर उन्हे टेक्स देना पड गया। नेपाली प्रवेश का वास्तविक शुल्क तीन हजार रु. का था,लेकिन दलाल के चक्कर में कुल 8 हजार देना पड गए। 


खैर यहां से आगे बढे। हमारी मंजिल थी चितवन,जो कि करीब 425 किमी दूर था। इस वक्त सुबह के साढे नौ हो चुके थे। यहां से आगे बढे। ये महेन्द्र राजमार्ग था,जिस पर हम चल रहे थे। सडक़ के चौडीकरण का काम चल रहा था। इस वजह से दो तीन किमी चलते ही कोई ना कोई डायवर्शन आजाता था। 

हमें लम्बी दूरी तय करना थी। करीब बारह बजे रास्ते में दमक नामक एक जगह पर रुक कर नाश्ता करना था। यहीं मोबाइल की सिम भी लेना थी। मोबाइल की सिम लेने जहां रुके वहीं नाश्ते की चिन्ता भी कर ली। समय तो भोज नका ही हो रहा था। मैने तो दो आलू पराठे दबा लिए ताकि दिन भर का काम हो जाए। यहां सिम लेने का भी काम पूरा हो गया। नेपाल में एनसेल कम्पनी की सिम चलती है। सभी ने दो सौ रुपए में सात दिन के लिए एनसेल की सिम मोबाइल में लगा ली। दो सौ रुपए में वाइस काल नहीं मिलती,केवल सिमकार्ड और डाटा मिलता है। वाइस काल के लिए 7 दिन का 270 रु. का पैक मिलता है,जो कि मात्र 70 मिनट टाक टाइम सात दिनों के लिए मिलता है। मैने टाक टाइम भी ले लिया। नाश्ते के नाम पर भोजन किया और यहां से आगे बढे। 


अब तक मैं गाडी में पीछे बैठा था,लेकिन मेरे पैरो की हालत खराब हो गई थी। मैने कहा मैं पीछे नहीं बैठ सकता। सीट बहुत नीची है। मैं अगली सीट पर आ गया। यहां से चितवन की दूरी करीब तीन सौ किमी थी और करीब आठ घण्टे का वक्त लगना था। 


जिस रोड पर हम चल रहे थे,वह महेन्द्र राजमार्ग था,जो चितवन होते हुए सीधे काठमाण्डू तक जाता है। करोड के चौडीकरण के कारण जगह जगह डायवर्शन थे और रोड की हालत बेहद खराब थी। चलने की गति बेहद धीमी थी। दोपहर के दो बज चुके थे। मेरे अलावा सभी को भूख लग रही थी,लेकिन रीता जी ने कहा कि भोजन बर्दीबास नामक स्थान पर करेंगे,जो कि अभी करीब सौ किमी दूर था। यानी कम से कम दो घण्टे और लगना थे। बताया गया कि थकाली भोजनालय में बेहतरीन नेपाली खाना मिलता है। थकाली भोजनालय में थकाली शब्द एक जाति विशेष का सूचक है जो नेपाली भोजन को विशेष प्रकार से बनाते है। जैसे हमारे यहां सखवाल ब्राम्हणों को भोजन बनाने में निपुणता हासिल है,उसी तरह नेपाल में थकाली किचन की महिमा है। आखिरकार चार बजते बजते बरदीबास आया और यहां पहली मंजिल पर एक थकाली भोजनालय था,जहां मेरे अलावा सभी ने भोजन किया। 


हमें चितवन से करीब तीस किमी पहले नारायण घाट नामक स्थान पर रुकना था। रास्ते में कुछ स्थानों पर सडक़ की हालत अच्छी भी थी,इसलिए रात करीब साढे नौ बजे हम नारायण घाट के अपने होटल जमघट में पंहुच गए। ये पूरा रास्ता मैदानी इलाके में था,इस पूरे रास्ते में पहाड आदि नहीं थे। 

नारायण घाट पंहुचने पर रीता जी की एक साहित्यकार मित्र ऊषा तिवारी जी ने साहित्य संगम का कार्यक्रम शाम को पांच बजे रखा था,जिसे रद्द करके अब अगले दिन यानी कल सुबह 8 बजे रखा है। सुबह आठ बजे तैयार होना है इसलिए जल्दी उठना होगा।


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यात्रा वृत्तान्त-47 नेपाल यात्रा-भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन

 (9 नवंबर 2024 से 20 नवंबर 2024)


11 नवंबर 24 सोमवार  (दोपहर 12.45)

पटना-न्यू बरौनी स्टेशन के बीच

कोच न. बी-1-20 गांधीधाम-कामाख्या एक्सप्रेस

हमारी यह यात्रा शनिवार,रविवार की मध्यरात्रि 3 बजे (तारीख हो चुकी थी 10 नवंबर) रतलाम रेलवे स्टेशन से शुरु हुई। इस यात्रा में मैं और वैदेही भारत और नेपाल के कुछ साहित्यकारों द्वारा आयोजित की गई साहित्यिक यात्रा में भाग लेने के लिए नेपाल जा रहे है। ट्रेन से हम आज रात नौ बजे तक न्यू जलपाईगुडी (प.बंगाल) रेलवे स्टेशन पंहुचेंगे और वहां से फिर सडक़ मार्ग से नेपाल की छ: दिवसीय यात्रा पर निकलेंगे। मेरी यह यात्रा पिछली यात्रा के ठीक 110 दिनों के बाद हो रही है। इस 110 दिनों में काफी कुछ बदल गया है। 


पिछली यात्रा श्रीखण्ड कैलास की थी,जहां से हम 22 जुलाई को लौटे थे। उसके कुछ ही दिनों के बाद आशुतोष के पिताजी रामकृष्ण नवाल जी स्वर्गवासी हो गए। कुछ और दिन गुजरे,17 अगस्त को दादा (पिताजी गोपालराव कोठारी) स्वर्गवासी हो गए। इसके बाद दशहरा दीपावली की व्यस्तता और इसके तुरंत बाद ये यात्रा। 


इस यात्रा की तैयारी सितम्बर अंत से ही शुरु हो गई थी। वैदेही की मित्र रीता सिंह तेजपुर आसाम में कार्यरत है। पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी नामक संस्था चलाती है। इसी संस्था के बैनर तले भारत-नेपाल सांस्कृतिक यात्रा और साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन नेपाल में हो रहा है। यह आयोजन नेपाल के चितवन,पोखरा और काठमाण्डू में होगा।


रेल के टिकट सितम्बर अंत में करवा लिए थे,लेकिन वेटिंग के टिकट थे। ट्रेन 9 की रात को चलना थी,तो मैने सोचा कि 8 की दोपहर वीआईपी करवा लेंगे। 8 नवंबर की दोपहर डीआरएम आफिस पंहुचा। वहां जाकर पता चला कि इस ट्रेन में रतलाम से वीआईपी कोटा ही नहीं है। फिर डीआरएम आफिस से गांधीधाम मैसेज करवाया। मैसेज करवाने के बाद उम्मीद थी कि रिजर्वेशन कन्फर्म हो जाएगा। 8 की शाम को अचानक मैसेज आया कि 1 बर्थ कन्फर्म हो गई है। मुझे लगा कि ये रुटीन में कन्फर्म हो गई है। अब बची हुई एक बर्थ वीआईपी से कन्फर्म हो जाएगी। लेकिन 9 की दोपहर को पता लगा कि जो एक बर्थ कन्फर्म हुई थी,वह वीआईपी कोटे से ही हुई थी। रतलाम का चार्ट 9 की शाम को बनेगा तब पता चलेगा कि दूसरी बर्थ का क्या हुआ है? लेकिन शाम को जब चार्ज बना तो दूसरी बर्थ वेटिंग में ही रह गई थी। अब बडी चुनौती ये थी कि 42 घण्टों का लम्बा सफर दो लोगों को एक ही बर्थ से पूरा करना था। हमने सोचा,देखते है क्या होता है?


रात को पौने तीन बजे चिन्तन ने हमें कार से स्टेशन पर छोडा। ट्रैन ठीक समय पर आ गई थी। हम अपनी बर्थ पर पंहुचे। सीटों के नीचे सामान जमाया और एक ही बर्थ पर आडे तिरछे होकर पड गए। सुबह करीब साढे छ: बजे सामने की लोअर बर्थ पर सौ रहे सज्जन जाग गए और उन्होने कहा कि मैं उनकी बर्थ पर सो सकता हूं। फिर आराम से 9 बजे तक सोते रहे। इस तरह ट्रेन की पहली रात कट गई। अब चुनौती दूसरी रात गुजारने की थी। हमारे साथ दो सज्जन आरपीएफ के अधिकारी थे,जो किसी जांच के लिए गौहाटी जा रहे थे। उन्होने बताया कि लखनऊ से कुछ सीटें खाली होगी। रात को लखनऊ में टीटी से बात की। 500 का नोट दिया तो उसने सुबह तक के लिए बी-4 में 8 नम्बर बर्थ दे दी। इधर हमारे कम्पार्टमेन्ट में सामने की अपर बर्थ खाली थी। पहले मैं वहीं पर सौ गया। रात साढे बारह पर अयोध्या और सुबह साढे पांच बजे बनारस आना था। रात को सोया तो सुबह बनारस में उस बर्थ के यात्री ने आकर उठाया। फिर मैं उस बर्थ पर चला गया जो टीटी ने मुझे दी थी। सुबह नौ बजे तक मैं आराम से सोया। 


कल ट्रेन राजस्थान से उत्तर प्रदेश में गई थी। कानपुर लखनऊ,अयोध्या,वाराणसी,आदि स्थानों से होते हुए आज ट्रेन ने बिहार में प्रवेश किया। फिलहाल ट्रेन बिहार में चल रही है और हम पटना से न्यू बरौनी,खगरिया,कटिहार होते हुए न्यू जलपाईगुडी पंहुचेंगे। ट्रेन चल रही है। अभी दो घण्टे की देरी से चल रही है। देखते है हम कितने बजे न्यू जलपाईगुडी पंहुचते हैं।


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Saturday, January 11, 2025

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-10/ जहा गुजारी पहली रात वही आखरी रात भी


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21 जुलाई 2024 रविवार (रात 11.45)

प्रिन्स गेस्ट हाउस सवाई माधोपुर (राज.)


इस वक्त हम उसी होटल में रुके हैं जहां यात्रा की पहली रात गुजारी थी। कमरे में एसी चल रहा है और कमरा अच्छे से ठण्डा हो चुका है।बाहर बहुत गर्मी  है। हम गर्म माहौल में से ठण्डक में आए हैं। अच्छी फीलींग है।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-9 /शानदार बुग्याल बागा सहरन की एक रात


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20 जुलाई 2024 शनिवार (रात10.40)

होटल एवलांच कच्ची घाटी शिमला


इस वक्त मैं शिमला के बाहरी इलाके कच्ची घाटी में होटल एवलांच में हूं और सुबह यहां से जल्दी निकलने की इच्छा के साथ इस वक्त डायरी लिख रहा हूं। 





श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-8/ 9 किमी की ढलान के बाद बराठी नाले में अद्भुत स्नान


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19 जुलाई शुक्रवार (रात 11.46)

20 जुलाई 24 शनिवार (प्रात: 9.00)

के-2 हाईट्स बागा सहरन


इस वक्त हम जाओ गांव से 14 किमी उपर बागा सहरन नामक स्थान पर सुबह की तैयारियों में जुटे हैं। हम यहां बीती शाम 7.30 पर पंहुचे थे। रात 11.46 पर डायरी लिखने की कोशिश की थी,लेकिन थकान और नींद इतनी ज्यादा थी कि 4 लाइन भी नहीं लिख पाया। इसलिए अब कल का पूरा घटनाक्रम आज लिख रहा हूं।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-7/ लगातार 19 घंटो की ट्रेकिंग और श्रीखंड कैलास के दिव्य दर्शन


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18 जुलाई 2024 गुरुवार (शाम 5.45)

थाचडू बेस कैम्प.श्रीखण्ड यात्रा मार्ग


हम अब वापसी की यात्रा कर रहे है और इस वक्त भीमद्वार से चल कर थाचडू आ चुके हैं। आज हम 14 किमी चल चुके हैं। 

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-6 श्रीखंड कैलास के लिए आधी रात को ट्रेकिंग


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आठवां दिन


17 जुलाई 2024 बुधवार (सुबह 9.15)

भीमद्वार बैस कैम्प


मैं,आशुतोष और प्रकाशराव हम तीनो इस वक्त भीमद्वार के उसी टेण्ट में मौजूद है,जहां बीती रात हम सोये थे। 

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-5/ ग्लेशियर को पार करके आ गए भीमद्वार


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सातवां दिन

16 जुलाई 2024 मंगलवार (दोपहर 3.00)

भीमद्वार (श्रीखण्ड कैलास यात्रा मार्ग)


इस वक्त भीम द्वार में जबर्दस्त तेज बारिश हो रही है और भाग्यशाली है कि बारिश तेज होने से पहले टेण्ट में आ चुके है। आज की हमारी यात्रा भीमतलाई से सुबह सवा आठ बजे शुरु हुई थी। भीमतलाई से अगली पहाडी के टाप पर हमे कुंशा कैम्प नजर आ रहा था। लेकिन कुंशा तक पंहुचने के लिए हमे सीधे पहाड से नीचे उतरना था।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-4 / काली टॉप चढ़ कर उतरे और पहुंचे भीम तलाई


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छठा दिन 

15 जुलाई 2024 सोमवार (अपरान्ह 3.00)

भीम तलाई (अपर)


इस वक्त हम अपर भीमतलाई में एक टेण्ट लेकर रुक गए है। हमने आज सुबह 7.50 पर थाटीविल से चलना प्रारंभ किया था।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-3 - 12 घंटो में 12 किमी की खड़ी चढ़ाई


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पांचवा दिन 

14 जुलाई 2024 रविवार (शाम 6.50)

थाटीविल (श्रीखण्ड कैलास यात्रा मार्ग)


इस वक्त हम थाटी विल की एक दुकान में रात्रि विश्राम के लिए रुके हुए हैं। आज हम सुबह साढे छ: बजे से 12 घण्टे लगातार चल कर कुल 12 किमी की दूरी तय करके यहां पंहुचे है।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-2 पहाड़ो के बीच गाड़ी का सफर

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12 जुलाई 2024  शुक्रवार (रात 10.45)

बुशहर सदन रामपुर बुशहर (हिप्र)


इस वक्त हम रामपुर बुशहर के इस सरकारी होटल या यूं कहे कि रेस्ट हाउस में है। हम यहां 7.45 पर पंहुच गए थे। बिना मशक्कत के बुशहर सदन मिल गया और यहां तीसरी मंजिल के दो कमरों में हम टिक गए। हम रतलाम से अब तक 1250 किमी दूर आ चुके है। 

यात्रा वृत्तान्त-46 श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा


(10 जुलाई 24 से 22 जुलाई 24 तक)

शुरूआती सफर 

10 जुलाई 2021 बुधवार (रात 11.30)

प्रिन्स गेस्ट हाउस (सवाई माधोपुर राज.)


हमारी ये यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। इस बार लक्ष्य है श्रीखण्ड महादेव का दर्शन करना। इस वक्त हम सवाई माधोपुर से कुछ ही दूर यहां प्रिन्स गेस्ट हाउस में रुके है। एटलेन एक्सप्रेस वे ठीक सामने है,कल सुबह इसी एटलेन से दिल्ली और आगे का सफर करेंगे।

Saturday, September 21, 2024

अयोध्या-3 /रामलला की अद्भुत श्रृंगार आरती


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 12 मार्च 2024 मंगलवार (रात्रि 9.45) 

साबरमती एक्सप्रेस कोच न. ए-2-43  

अयोध्या की यात्रा अब समाप्ति पर है। हम रतलाम लौट रहे हैं और इस वक्त साबरमती एक्सप्रेस रतलाम की ओर दौड रही है।  

आज की शुरुआत बेहद खास रही।ये दिन बडा खास रहा और इसकी जानकारी कल रात ही मिल गई थी। कारसेवक पुरम में कल सुबह गए थे। वहां कई लोगों से परिचय हुआ था। रात को कारसेवक पुरम से अभिनव नामक युवक का फोन रोचन के पास आया कि क्या आप लोग सुबह आरती में शामिल होना चाहते है? अन्धा क्या चाहे? दो आंखे। कौन इंकार कर सकता था। उन्होने सभी के आधार साफ्ट कापी में मंगवाए और रोचन से कहा कि आपलोग सुबह पांच बजे मन्दिर के मुख्य द्वार पर पंहुच जाएं।   

अयोध्या-2 /राम मन्दिर के लिए रामशिला की भेंट और नन्दीग्राम का भ्रमण

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  11 मार्च 2024 सोमवार,रात 9.15 

जानकी महल अयोध्या धाम  

आज के व्यस्ततम दिन का समापन होने को है। मैं डायरी के साथ हूं और बाकी लोग भोजन कर रहे हैं।

 कल हमें बताया गया था कि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपतराय जी सुबह 8 और 8.30 के बीच मिल सकते है। उन्हे राम शिला भेंट करना थी,इसलिए सुबह 8 बजे यहां से निकलने का इरादा था।  लेकिन प्रतिमा ताई,रोचन,वैदेही और नलू आत्या सुबह 6 बजे मन्दिर के पट खुलते ही रामलला का फिर से दर्शन करना चाहते थे। इसलिए ये चारो सुबह पौने छ: बजे दर्शन करने के लिए रवाना हो गईं। उम्मीद थी कि ये लोग आठ बजे के पहले लौट आएंगी। लेकिन मन्दिर के पट 6 बजे नहीं बल्कि सात बजे खुलते है,इसलिए ये सभी साढे आठ बजे दर्शन करके वापस लौटी।

यात्रा वृत्तान्त-45/ प्राणप्रतिष्ठा के बाद अयोध्या यात्रा (8 मार्च 2024 से 13 मार्च 2024)


 भव्य जन्मभूमि मन्दिर में रामलला की आरती 


 9 मार्च 24 शनिवार (रात 10.45) 

जानकी महल नया घाट अयोध्या धाम  


अयोध्या की पिछली यात्रा 21 दिसम्बर 23 को रतलाम से शुरु हुई थी और 24 दिसम्बर को हम अयोध्या पंहुच गए थे। 26 दिसम्बर को सुबह करीब नौ बजे अयोध्या से वापसी के लिए निकल गए थे। इस हिसाब से अयोध्या की  पिछली यात्रा के ठीक 73 दिन बाद मैं फिर से अयोध्या आ चुका हूं।  अयोध्या की ये यात्रा पूरी तरह पारिवारिक है। सौ.आई और दादा को श्री राम लला के दर्शन करवाने के लिए ये यात्रा की जा रही है। इस यात्रा में मेरे अलावा,वैदेही,चिन्तन,प्रतिमा ताई,रोचन,नलू आत्या,नारायण और आरती वहिनी इस तरह हम कुल दस लोग अयोध्या पंहुचे है।

Wednesday, September 18, 2024

यात्रा वृत्तान्त-44/ अयोध्या की एक संक्षिप्त यात्रा (21 दिसम्बर 2023 से 27 दिसम्बर 2023 )

22 दिसम्बर 2023 शुक्रवार (रात 1.00)

 पप्पू एण्ड पप्पू रिजार्ट,सोनकच्छ 


 पिछली यात्रा आदि कैलास वाली 12 सितम्बर 23 को समाप्त हुई थी। फिर विधानसभा चुनाव आ गए। इस यात्रा की कोई योजना नहीं थी। 13 दिसम्बर को मलय,मिजोरम से आने वाला था,उसे लेने इ्नदौर गए। समय था,इसलिए एयरपोर्ट के नजदीक बाबा मौर्य के घर चले गए। बैठे,बातें हुई। तो बाबा ने कहा कि राम मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा से पहले एक बार अयोध्या चलना चाहिए। मैने फौरन हां कह दिया। रात दो बजे रतलाम लौटे थे। लेकिन अगले ही दिन बाबा का फोन आ गया कि अयोध्या चलना ही है। मैने भी हां कह दिया। फिर राजेश घोटीकर को भी चलने के लिए तैयार किया। 

Monday, May 6, 2024

जारी है जुमलो के जरिये जनता का जनादेश जीतने का जतन

 -तुषार कोठारी


देश की सरकार बनाने के आम चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके है। पिछले कई दशकों में शायद यह पहली बार ही हो रहा है कि देश भर में बहस हारने जीतने को लेकर नहीं बल्कि सिर्फ इस बात को लेकर हो रही है कि मोदी जी चार सौ पार करेंगे या नहीं। यानी कि चुनाव में हार जीत कोई मुद्दा ही नहीं है। जीत हर कोई मान चुका है अब मुद्दा सिर्फ संख्या का है।

Sunday, April 14, 2024

अनुच्छेद 370 हटाने के कारण मोदी को 370 का पुरस्कार देने को तैयार है मतदाता

 -तुषार कोठारी 


 देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव का शोर है और भाजपा समेत सारे राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में जुटे है। इन चुनावों में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का मुद्दा भी सुनाई दे रहा है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के मुद्दे पर भाजपा को छोडकर तमाम राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए है। विपक्षी दलों की हालत सांपु छछून्दर वाली हो रही है। यहां तक कि भाजपा के नेता विपक्षी दलों को खुली चुनौती भी दे रहे है कि अगर उनमें दम हैं तो वे कहें कि वे अनुच्छेद 370 फिर से ले आएंगे। भाजपा के रणनीतिकार जानते है कि किसी विपक्षी नेता की अब ये ताकत नहीं है कि वे अनुच्छेद 370 को फिर से लाने की बात कह सके। यहां तक कि कश्मीर दोनो प्रमुख राजनीतिक दल नेशनल कांफ्रेंस  और पीडीपी भी अब इस मुद्दे पर मौन साध कर बैठ गए हैं।  आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? 

Sunday, December 17, 2023

आदि कैलास यात्रा-(अंतिम)- बारिश और भू स्खलन के बीच वापसी और नरी सैमरी माता के दर्शन

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10 सितम्बर 23 रविवार (सुबह 8.20) 
होटल हिमालय दर्र्शन बैरिनाग
 

 इस वक्त हम निकलने की तैयारी कर रहे हैं। प्रकाश राव अभी अभी उठे है। उनका स्वास्थ्य अब वे ठीक बता रहे हैं। आशुतोष और मेरा स्नान अभी बाकी है। दूसरे कमरे में टोनी काफी देर से जागा हुआ है,दशरथ जी को मैं उठा कर आया हूं।  कल दोपहर से हल्की बारिश शुरु हो गई थी। कभी धीमी,कभी तेज। इस वक्त भी बारिश हो रही है। होटल के कमरे के बाहर पूरे पहाड का शानदार नजारा दिखाई देता है। लेकिन बारिश हो रही है,तो बादलों ने पूरे इलाके को ढंक लिया है। बादलों की वजह से कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। होटल का व्यू मौसम साफ होता तो बेहद शानदार होता।

नेपाल यात्रा-7 पशुपतिनाथ के दर्शनों के साथ नेपाल से वापसी

 प्रारंभ से पढने के लिए यहां क्लिक करें 16 नवंबर 2024 विश्व विख्यात पशुपतिनाथ मन्दिर होटल के बिलकुल सामने ही था। सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नान...