(9 नवंबर 2024 से 20 नवंबर 2024)
11 नवंबर 24 सोमवार (दोपहर 12.45)
पटना-न्यू बरौनी स्टेशन के बीच
कोच न. बी-1-20 गांधीधाम-कामाख्या एक्सप्रेस
हमारी यह यात्रा शनिवार,रविवार की मध्यरात्रि 3 बजे (तारीख हो चुकी थी 10 नवंबर) रतलाम रेलवे स्टेशन से शुरु हुई। इस यात्रा में मैं और वैदेही भारत और नेपाल के कुछ साहित्यकारों द्वारा आयोजित की गई साहित्यिक यात्रा में भाग लेने के लिए नेपाल जा रहे है। ट्रेन से हम आज रात नौ बजे तक न्यू जलपाईगुडी (प.बंगाल) रेलवे स्टेशन पंहुचेंगे और वहां से फिर सडक़ मार्ग से नेपाल की छ: दिवसीय यात्रा पर निकलेंगे। मेरी यह यात्रा पिछली यात्रा के ठीक 110 दिनों के बाद हो रही है। इस 110 दिनों में काफी कुछ बदल गया है।
पिछली यात्रा श्रीखण्ड कैलास की थी,जहां से हम 22 जुलाई को लौटे थे। उसके कुछ ही दिनों के बाद आशुतोष के पिताजी रामकृष्ण नवाल जी स्वर्गवासी हो गए। कुछ और दिन गुजरे,17 अगस्त को दादा (पिताजी गोपालराव कोठारी) स्वर्गवासी हो गए। इसके बाद दशहरा दीपावली की व्यस्तता और इसके तुरंत बाद ये यात्रा।
इस यात्रा की तैयारी सितम्बर अंत से ही शुरु हो गई थी। वैदेही की मित्र रीता सिंह तेजपुर आसाम में कार्यरत है। पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी नामक संस्था चलाती है। इसी संस्था के बैनर तले भारत-नेपाल सांस्कृतिक यात्रा और साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन नेपाल में हो रहा है। यह आयोजन नेपाल के चितवन,पोखरा और काठमाण्डू में होगा।
रेल के टिकट सितम्बर अंत में करवा लिए थे,लेकिन वेटिंग के टिकट थे। ट्रेन 9 की रात को चलना थी,तो मैने सोचा कि 8 की दोपहर वीआईपी करवा लेंगे। 8 नवंबर की दोपहर डीआरएम आफिस पंहुचा। वहां जाकर पता चला कि इस ट्रेन में रतलाम से वीआईपी कोटा ही नहीं है। फिर डीआरएम आफिस से गांधीधाम मैसेज करवाया। मैसेज करवाने के बाद उम्मीद थी कि रिजर्वेशन कन्फर्म हो जाएगा। 8 की शाम को अचानक मैसेज आया कि 1 बर्थ कन्फर्म हो गई है। मुझे लगा कि ये रुटीन में कन्फर्म हो गई है। अब बची हुई एक बर्थ वीआईपी से कन्फर्म हो जाएगी। लेकिन 9 की दोपहर को पता लगा कि जो एक बर्थ कन्फर्म हुई थी,वह वीआईपी कोटे से ही हुई थी। रतलाम का चार्ट 9 की शाम को बनेगा तब पता चलेगा कि दूसरी बर्थ का क्या हुआ है? लेकिन शाम को जब चार्ज बना तो दूसरी बर्थ वेटिंग में ही रह गई थी। अब बडी चुनौती ये थी कि 42 घण्टों का लम्बा सफर दो लोगों को एक ही बर्थ से पूरा करना था। हमने सोचा,देखते है क्या होता है?
रात को पौने तीन बजे चिन्तन ने हमें कार से स्टेशन पर छोडा। ट्रैन ठीक समय पर आ गई थी। हम अपनी बर्थ पर पंहुचे। सीटों के नीचे सामान जमाया और एक ही बर्थ पर आडे तिरछे होकर पड गए। सुबह करीब साढे छ: बजे सामने की लोअर बर्थ पर सौ रहे सज्जन जाग गए और उन्होने कहा कि मैं उनकी बर्थ पर सो सकता हूं। फिर आराम से 9 बजे तक सोते रहे। इस तरह ट्रेन की पहली रात कट गई। अब चुनौती दूसरी रात गुजारने की थी। हमारे साथ दो सज्जन आरपीएफ के अधिकारी थे,जो किसी जांच के लिए गौहाटी जा रहे थे। उन्होने बताया कि लखनऊ से कुछ सीटें खाली होगी। रात को लखनऊ में टीटी से बात की। 500 का नोट दिया तो उसने सुबह तक के लिए बी-4 में 8 नम्बर बर्थ दे दी। इधर हमारे कम्पार्टमेन्ट में सामने की अपर बर्थ खाली थी। पहले मैं वहीं पर सौ गया। रात साढे बारह पर अयोध्या और सुबह साढे पांच बजे बनारस आना था। रात को सोया तो सुबह बनारस में उस बर्थ के यात्री ने आकर उठाया। फिर मैं उस बर्थ पर चला गया जो टीटी ने मुझे दी थी। सुबह नौ बजे तक मैं आराम से सोया।
कल ट्रेन राजस्थान से उत्तर प्रदेश में गई थी। कानपुर लखनऊ,अयोध्या,वाराणसी,आदि स्थानों से होते हुए आज ट्रेन ने बिहार में प्रवेश किया। फिलहाल ट्रेन बिहार में चल रही है और हम पटना से न्यू बरौनी,खगरिया,कटिहार होते हुए न्यू जलपाईगुडी पंहुचेंगे। ट्रेन चल रही है। अभी दो घण्टे की देरी से चल रही है। देखते है हम कितने बजे न्यू जलपाईगुडी पंहुचते हैं।
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