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18 नवंबर 24 सोमवार (रात 8.00 बजे)
गौहाटी ओखा द्वारका एक्सप्रेस (कोच बी-2-17,18)
हमारी ट्रेन अब हमारे घर की दिशा में तेजी से दौड रही है और 20 नवंबर की सुबह हम रतलाम में होंगे। पूरे सफर में ट्रेन के डिब्बे में ही सबसे ज्यादा खाली वक्त मिल रहा है। शायद ये ऐसी पहली यात्रा थी,जिसमें डायरी बहुत कम लिख पाया। बेहद अस्तव्यस्त यात्रा के चलते डायरी लिखने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं मिल पाया। इसलिए अब ट्रेन में चलने के दौरान ही सबकुछ लिखना है।





















