Saturday, December 27, 2025

नेपाल यात्रा-6 विन्ध्य वासिनी के दर्शनों के बाद पशुपतिनाथ की ओर

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15 नवंबर-

पोखरा का दूसरा दिन। आज हमें विन्ध्य वासिनी देवी के दर्शन करके काठमाण्डू पंहुचना था। सुबह जल्दी उठकर निकलने की योजना थी। करीब नौ बजे होटल से निकले। विन्ध्य वासिनी पोखरा का प्रसिध्द धर्मस्थल है। एक विन्ध्य वासिनी हमारे मध्यप्रदेश में मैहर माता के रुप में मौजूद है,दूसरी यहां है।


विन्ध्यवासिनी देवी के दर्शन किए । यहां विडीयो भी बनाए। यहां एक टावर बनाकर व्यू पाइन्ट बनाया गया है,जहां से नेपाल की कई प्रसिध्द पर्वत चोटियां नजर आती है। मौसम साफ था इसलिए हमें भी यहां से माछा पूच्छा चोटी नजर आ गई थी। माछा पूच्छा यानी मछली की पूछ जैसी। यह चोटी इसी आकार की है।


हमारे साथ चितवन से आई ऊषा तिवारी जी को यहीं से वापस लौटना था। देवी दर्शन के बाद यहां से निकले। ऊषा जी मोंगलिंग तक हमारे साथ ही जाने वाली थी। सुबह देवी दर्शन के बाद उनके रिश्तेदार के होटल में ही नाश्ता भोजन किया था और पोखरा से रवाना हो गए थे। 


गाडी के सभी यात्री साहसी यात्री थे। इनोवा में हम कुल नौ लोग फंसे हुए थे।  यात्रा आयोजन रीता सिंह जी,उनकी बहिन पूजा और सहेली ऊषा तिवारी। अरुणाचल से आई गुम्फी जी और उनका बेटा लिदिन। तुमुल जी,वैदेही और ड्राइवर प्रदीप पाल। नेपाल के जर्जर पहाडी रास्तों पर इस तरह से फंस फंसा कर साहसी लोग ही यात्रा कर सकते हैं।


पोखरा से बढे। दोपहर करीब दो बजे मोंगलिंग पंहुचे। जहां सभी ने दोपहर का भोजन किया,मेरे अलावा। नेपाल के टूटे फूटे महेन्द्र राजमार्ग पर चलते हुए हम शाम करीब छ: बजे काठमाण्डू के हमारे होटल रामेश्वरम पंहुच गए। नेपाल में अंधेरा साढे पांच बजे ही हो जाता है। होटल के कमरे में पंहुचे। अभी कहीं आने जाने का इरादा नहीं था। पशुपतिनाथ के दर्शन करने के लिए सुबह छ: बजे नहा धोकर जाना था। मन्दिर होटल के सामने ही सडक़ के दूसरी तरफ था। 


रात्रिकालीन चर्चा के बाद इस दिन का समापन हुआ।

नेपाल यात्रा-5 पोखरा की फेवा झील के साथ चमत्कारिक गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन

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18 नवंबर 24 सोमवार (रात 8.00 बजे)

गौहाटी ओखा द्वारका एक्सप्रेस (कोच बी-

2-17,18


हमारी ट्रेन अब हमारे घर की दिशा में तेजी से दौड रही है और 20 नवंबर की सुबह हम रतलाम में होंगे। पूरे सफर में ट्रेन के डिब्बे में ही सबसे ज्यादा खाली वक्त मिल रहा है। शायद ये ऐसी पहली यात्रा थी,जिसमें डायरी बहुत कम लिख पाया। बेहद अस्तव्यस्त यात्रा के चलते डायरी लिखने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं मिल पाया। इसलिए अब ट्रेन में चलने के दौरान ही सबकुछ लिखना है।


14 नवंबर 24

जिस समय डायरी छूटी थी,उस वक्त में पोखरा भ्रमण की कथा कह रहा था। सूर्योदय देखने की असफल कोशिश और बेवजह तीन घण्टे खराब होने के बाद हम करीब दस बजे होटल वापस लौटे थे। हमारी होस्ट रीता जी और ऊषा जी ने कहा कि हमे बहुत जल्दी निकलना होगा,तभी हम पोखरा घूम सकेंगे। 


लेकिन मैं और तुमुल सिन्हा जी वैसे ही भडके हुए थे,इसलिए हमने कहा कि नहाने धोने में जितना समय लगता है,उतना तो लगेगा ही। हमें तैयार होने में करीब डेढ घण्टा लगा और हम साढे ग्यारह बजे पोखरा घूमने निकल पाए। 


पोखरा में हमारे होटल का नाम सी लेक था। पोखरा में फेवा झील बहुत प्रसिध्द झील है और हमारा होटल झील के बिलकुल नजदीक था,इसलिए होटल का नाम सी लेक था। फेवा लेक पहाडों के बीच बनी हुई बेहद विशाल झील है। फेवा झील करीब 4 किमी लम्बी और करीब 9 किमी चौडी झील है। फेवा झील को पहले बैदाम ताल कहा जाता था। यह झील पोखरा घाटी के दक्षिण में स्थित है और इसमे पोखरा शहर,सारंगकोट और कास्किकोट के कुछ हिस्से शामिल है। यह नेपाल की रारा झील के बाद दूसरी और नेपाल के गण्डकी प्रान्त की सबसे बडी झील है। झील के बीचोबीच में एक छोटे से टापू पर ताल बाराही मन्दिर है,जहां सिर्फ बोट से ही जाया जा सकता है। 

 

चूंकि होटल के सबसे नजदीक फेवा झील थी,इसलिए पोखरा भ्रमण की शुरुआत यहीं से की गई। हम करीब साढे ग्यारह बजे फेवा झील पर पंहुचे। यहां आने वाले पर्यटक बोटिंग का आनन्द लेते है। पैडल बोट भी यहां बडी संख्या में हैं। लेकिन हममे से कोई भी बोटिंग करने का इच्छुक नहीं था,बल्कि बोट से ताल बाराही मन्दिर के दर्शन जरुर सभी करना चाहते थे। बोट से ताल बाराही मन्दिर जाने के लिए सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनना होती है। लाइफ जैकेट पहन कर सभी एक बोट में सवार हुए और ताल बाराही मन्दिर के टापू पर जा पंहुचे। इसछोटे से टापू पर शिव जी का मन्दिर है। गणेश जी और हनुमान जी भी यहां स्थापित है। टापू पर पंहुचकर मैने इसका विडीयो बनाया। हमें बताया गया कि इस टापू पर एक बूढी महिला रहती थी। एक रात बहुत तेज बारिश हुई और इस बारिश के दौरान एक महिला बूढी महिला के पास पंहुची और रात गुजारने का आश्रय मांगा। बूढी महिला ने उसे अपनी झोपडी में रात गुजारने के लिए जगह दे दी। वह ताल बाराही देवी थी। उसने बूढी महिला को वरदान दिया कि इस बारिश से आसपास सब कुछ डूब जाएगा,लेकिन ये झोपडी नहीं डूबेगी। तभी से इसके चारो ओर पानी है,लेकिन यह टापू बीच में मौजूद थे। ताल बाराही टापू पर मन्दिरों के दर्शन करके हम वापस किनारे पर लौटे। 

होटल से निकलते वक्त मैने कुछ भी खाया पिया नहीं था। मुझे उम्मीद थी कि जहां जाएंगे वहां कुछ ना कुछ खाने को मिल ही जाएगा। लेकिन झील के किनारे पर खाने के लिए कुछ नहीं मिला। भूख से मेरी हालत खराब होने लगी थी। लेकिन झील से निकल कर चितवन वाली ऊषा जी हमें महेन्द्र गुफा ले गई। महेन्द्र गुफा के बाहर भी कुछ भी खाने पीने को नहीं मिला।


महेन्द्र गुफा जमीन से काफी नीचे एक बहुत विशाल गुफा है,जिसका नाम नेपाल के महाराजा महेन्द्र के नाम पर रखा गया है। नीचे उतरने के बाद गुफा में जब आगे बढते हैं,तो करीब सौ मीटर चलने के बाद दोराहा आ जाता है। बाई ओर का रास्ता अंधेरा है और इसे बन्द किया हुआ है और इसे बेट केव यानी चमगादडों की गुफा कहतै है। कहते हैं कि ये काफी भीतर तक गई है और इसमें आमतौर पर कोई नहीं जाता। लेकिन इसके विपरित दाहिनी ओर आगे बढते हैं,तो गुफा का रास्ता आगे बढते हुए शिवजी के मन्दिर पर जाकर समाप्त होता है।

यहां शिवलिंग और गणेश जी की प्राकृतिक रुप से बनी हुई मूर्तियां विराजित है। यहां एक पण्डित जी भी विराजित थे। इसी स्थान पर पवित्र जल का चमत्कारिक कुण्ड भी है,जिसका पानी कभी समाप्त नहीं होता। मैने गुफा का विडीयो बनाया। पाण्डित जी का इंटरव्यू भी लिया। पण्डित जी ने बताया कि गुफा या तो पानी से बनती है या फिर ज्वालामुखी से। यह गुफा ज्वालामुखी से बनी हुई है। उन्होने कुण्ड का चमत्कारिक जल हम लोगों पर छिडका और चरणामृत की तरह हाथों पर भी दिया। महादेव और गणेश जी के दर्शन कर हम गुफा से बाहर निकले।


घडी अब एक बजे का वक्त दिखा रही थी और मैने सुबह से कुछ भी नहीं खाया था। भूख से मेरी हालत खराब हो रही थी।पोखरा में ऊषा जी के एक रिश्तेदार का रेस्टोरेन्ट था,उन्होने वहीं सभी के नाश्ते की व्यवस्था की थी। हम करीब एक बजे उस होटल में पंहुचे। यहां आलू पराठे बनाए गए थे। मैने तो इसी से अपना भोजन कर लिया। अब दोपहर के सवा दो बज गए थे। 


रीता जी और ऊषा जी ने बताया कि पोखरा का साहित्यिक कार्यक्रम शाम को पांच बजे हैं,इसलिए अब घूमने के लिए हमारे पास मात्र तीन घण्टे है। इसलिए उन्होने हमें देवी फाल दिखाने का प्रस्ताव रखा। हममे से कोई भी पोखरा के बारे में कुछ जानता नहीं था। हमें क्या पता,कहां जाना है? क्या देखना है?,देवी फाल तो देवी फाल ही सही। देवी फाल पंहुचे,यहां के टिकट लिए और भीतर गए तब तक चार बज चुके थे। 


देवी फाल में नदी का पानी बेहद तेज बहाव से गिरता है। हांलाकि झरना ज्यादा उंचाई से नहीं गिरता,लेकिन पानी का बहाव इतना तेज है कि यहां पानी की बूंदे भाप बनकर या धुएं की शक्ल में उडती है। बेहद तेज बहाव में बहता यह पानी थोडा ही आगे जाकर लुप्त हो जाता है। यहां के विडीयो बनाए। इसी दौरान यहां के बोर्ड पर देखा कि गुप्तेश्वर महादेव यहां से मात्र सौ मीटर की दूरी पर है। जो कि एशिया की सबसे प्राचीन और सबसे विशाल गुफा में विराजित है। मैने रीता जी और ऊषा जी को गुप्तेश्वर देखने का प्रस्ताव दिया तो उन्होने कार्यक्रम शुरु होने का हवाला दिया। लेकिन जब मैने उन्हे बताया कि यब बिलकुल नजदीक ही है,तो सब लोग वहां जाने को राजी हो गए। 


पूरी नेपाल यात्रा में सबसे शानदार और जबर्दस्त स्थान यही था। नेपाल सरकार ने इस गुफा के प्रवेश को अत्यन्त सुन्दर बनाया है। टिकट लेने के बाद गुफा के द्वार तक पंहुचने के लिए नीचे उतरती गोलाकार सीढियां बनाई गई है और इसकी दीवार पर देवी देवताओं की सुन्दर मूर्तियां तथा पौराणिक कथाओं जैसे समुद्र मंथन के दृश्यों वाली मूर्तियां लगाई गई हैं। नीचे उतरकर गुफा के द्वार पर पंहुचने के बाद जब गुफा में नीचे उतरते हैं तो सीढियां बनी हुई हैं,जो हमें करीब 50 फीट नीचे ले जाती है। यहां गुप्तेश्वर महादेव का मन्दिर है जो गोलाकार बना हुआ है। यहां कैमरे की मनाही थी,लेकिन मैने जैसे तैसे विडीयो बना ही लिया।


लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती,बल्कि यहां से शुरु होती है। महादेव के मन्दिर से आगे बढते हैं,तो थोडा नीचे उतरकर गुफा का रास्ता शुरु होता है,जो थोडा संकरा है,लेकिन एक व्यक्ति आराम से चल सकता है। गुफा का टेढा मेढा रास्ता करीब 500-700 मीटर लम्बा है और यह एख बेहद विशाल गुफा में पंहुचता है। बहुत ही विशाल गुफा जिसमें हर तरफ पानी टपकता रहता है। गुफा के एक कोने में महादेव और पार्वती माता की आमने सामने बैठी मूर्तियां है। गुफा के भीतर का वातावरण बडा ही डराने वाला है। इसमें हर ओर पानी तो टपक ही रहा है,ठण्ड भी बहुत है साथ ही आक्सिजन भी कम है। 


लेकिन चमत्कार इससे भी आगे है। गुफा में पंहुचने पर नीचे पानी का कुण्ड नजर आता है और इस कुण्ड के नजदीक पंहुचने के लिए लोहे की सीढियां लगाई गई है। करीब सौ सीढियां उतरकर जब पानी के कुण्ड के पास पंहुचते है,तो जाकर पता चलता है कि यहां वही पानी आ रहा है,जो देवी फाल में लुप्त हो गया था।  इस गुफा के आखरी छोर पर देवी फाल भी नजर आने लगता है। इस पूरी गुफा में भी देवी फाल के पानी का धुआं धुआं भरा हुआ है।


देवी फाल देखने के लिए हम सडक़ के दाहिनी ओर गए थे और फिर टिकट लेकर काफी भीतर जाकर देवी फाल देखा था। गुप्तेश्वर महादेव के लिए हम सडक़ पार करके देवी फाल के विपरित दिशा में गए थे।  लेकिन अब गुफा में नीचे नीचे चलते हुए हम नीचे से सडक़ पार करके फिर से देवी फाल के नजदीक पंहुच गए थे। 

वापस लौटने के लिए सौ सीढियां चढनी थी। बाहर आने तक पसीने से भीग चुके थे। अरुणाचल की हिन्दी अधिकारी गुम्फी जी मेरे पीछे पीछे ही नीचे तक आई थी,जब मैं वापसी में गुप्तेश्वर महादेव पंहुचा,तब मुझे वैदेही नजर आई।  बोली हम तुम्हारा इंतजार कर रहे थे। मैने कहा कि मैं तो नीचे जाकर आ चुका हूं,अब तुम नीचे जाकर देख लो। वैदेही लौटने तक काफी थक चुकी थी। 


अभी साढे पांच हो चुके थे,लेकिन जो भी गुप्तेश्वर जाकर आया था बेहद खुश था। उधर होटल में कार्यक्रम के लिए कुछ साहित्यकारों के आने की बात कही जा रही थी। इसलिए फौरन होटल लौटना था। 


सभी लोग गाडी में सवार हुए और होटल पंहुचे। यहां होटल में आठ-दस लघु कथाकार और साहित्यकार पंहुचे हुए थे। एक दूसरे का स्वागत सम्मान और रचना पाठ का दौर शुरु हो गया,जो करीब दो ढाई घण्टे चला। इसके बाद भोजन की व्यवस्था थी। 


मैं और तुमुल सिन्हा जी एक ही कमरा शेयर कर रहे थे। फिर हमारा चर्चासत्र शुरु हुआ जो करीब पौने बारह बजे तक चला। इसके बाद सोने का मौका मिला और इस तरह पोखरा का यह दिन समाप्त हुआ। कल पोखरा में विन्ध्यवासिनी के दर्शन करते हु ए काठमाण्डू के लिए निकलना है।


नेपाल में घूमने के दौरान कई बातें ध्यान में आई। नेपाल के अधिकांश मुख्य हाईवेज की हालत फिलहाल खस्ता है। यहां होटल दो प्रकार के होते है। भान्छा घर और खाजा घर। भान्छा घर यानी जहां भोजन उपलब्ध होता है,खाजा घर यानी नाश्ता उपलब्ध होता है,भोजन नहीं। शराब हर दुकान पर उपलब्ध है। यहां शराब की अलग दुकानें नहीं है। नेपाल में थकाली भान्छा घर की धूम है। थकाली असल में नेपाल की एक जाति है और थकाली जाति के लोग विशीष्ट प्रकार का भोजन बनाते है,इनकी रैसिपी विशेष प्रकार की होती है,जो यहां काफी पसन्द की जाती है। ठीक वैसे ही जैसे हमारी तरफ सखवाल ब्राम्हणों के बारे में कहा जाता है। नेपाल में थकाली किचन के नाम पर कई नकली थकाली किचन भी चलते हैं। थकाली रैसिपी की बहुत मांग है। हांलाकि थकाली रैसिपी नानवेज में ही अधिक मायने रखती है।


नेपाल में अधिकांश लोग मांसाहारी है,इसलिए कोई भी होटल प्योर वेज नहीं मिलता। कभी कभार कहीं मारवाडी भोजनालय प्योर वेज नजर आ जाते है। नेपाली भाषा में व अक्षर का उच्चारण भ के रुप में किया जाता है,इसलिए यहां वेज को भेज कहा जाता है।


शुध्द शाकाहारी लोगों के लिए खाने के मामले में यहां कई दिक्कतें हैं। नाश्ते के आइटम अत्यन्त सीमित है। नाश्ते में पुरी तरकारी या सब्जी रोटी मिल जाती है। इसके अलावा चाउमिन,थुप्का और मोमो का चलन बहुत ज्यादा है। ये दोनो तरह के होते है वेज भी और नानवेज भी। मोमो को यहां मंमं लिखने है। इसके अलावा नाश्ते में उबले आलू और चने भी खाए जाते हैं। चाय ब्लैक और दूध वाली दोनो तरह की मिलती है। कहीं कहीं समोसा भी नजर आया। सेल रोटी एक नई चीज नजर आई,जो नाश्ते में खाई जाती है। सेल रोटी दो तीन तरह की दाल चावल आदि को मिलाकर गोल रिंग जैसी होती है। इसको तल कर परोसा जाता है। इसमे मिठास भी होती है। वडा सांभर में जिस तरह का वडा होता है,सेल रोटी ठीक वैसी ही लेकिन आकार में बडी होती है। सेल रोटी को ऐसी है जैसी किसी वडे को बडी रिंग के आकार में बना दिया गया हो। सेल रोटी को अकेले या सब्जी के साथ खाया जाता है।


नेपाल एक खासियत ये भी नजर आई कि यहां अंग्रेजी का चलन बहुत कम है। ना तो अंग्रेजी कैलेण्डर का उपयोग होता है और ना ही अंग्रेजी अंकों या संक्षेपाक्षरों का उपयोग किया जाता है। वाहनों की नम्बर प्लेट पर मधेश प्रदेश को एमपी की बजाय मप्र ही लिखा जाता है। वाहन के नम्बर भी देवनागरी लिपि में लिखे जाते है। इतना ही नहीं हम अभी सन 2024 में चल रहे थे,लेकिन नेपाल 2081 में है। यानी यहां विक्रम सम्वत का उपयोग होता है। नेपाल के करेन्सी नोटों पर भी देवनागरी लिपि का ही उपयोग किया जाता है।


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नेपाल यात्रा-4 पोखरा के सारंगकोट का सूर्योदय,जो हम नहीं देख पाए

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15 नवंबर 24 शुक्रवार प्रात: 8.55

होटल सी-लेक पोखरा


आज पोखरा से हमें निकलना है। इस वक्त हम निकलने के लिए तैयार हो रहे हैं। यहां से हम काठमाण्डू जाएंगे,जो कि दो सौ किमी दूर है। वहां पंहुचने में हमे करीब 8 घण्टे लगेंगे। हमें कहा गया है कि सुबह जल्दी निकलना होगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्दी तैयार हो जाएं।


15 नवंबर 24 शुक्रवार (रात 11.45)

होटल रामेश्वरम काठमाण्डू (नेपाल)


मैं इस वक्त नेपाल की राजधानी काठमाण्डू में पशुपतिनाथ मन्दिर के बिलकुल नजदीक रामेश्वरम होटल में हूं।


16 नवंबर 24 शनिवार सुबह 6.00

होटल रामेश्वरम काठमाण्डू

हमें जल्दी दर्शन करने जाना है,इसलिए मैं जाग चुका हूं और नित्यकर्म से निवृत्त हो चुका हूं। रात को काफी देर हो गई थी,इसलिए डायरी नहीं लिख पाया था। इस वक्त भी ज्यादा समय नहीं है। लेकिन फिलहाल बाथरुम बिजी है और इस खाली वक्त में मैं डायरी लिख रहा हूं।


बात 14 नवंबर की,जब हम पोखरा में थे और सुबह 4.30 बजे उठकर पोखरा का सूर्योदय देखने के लिए निकलने वाले थे। रात को हमसे कहा गया था कि पोखरा का सूर्योदय बडा ही सुन्दर होता है,लेकिन इसके लिए सुबह जल्दी निकलना होगा। मेरा सुबह जल्दी उठने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन बहुत ज्यादा दबाव डाला गया। कहा गया कि सिर्फ आधे घण्टे की बात है।


मैने भी सोचा कि चलो एकाध घण्टे के लिए सुबह जल्दी उठ जाता हूं। सुबह सिर्फ मुंह पर पानी के छींटे मारे और चल पडा,बाकी लोगों के साथ सूर्योदय देखने। सनराईज पाइन्ट पर समय रहते पंहुच गए। इसे सारंग कोट कहा जाता है। नेपाल की कई उंची चोटियां यहां से देखी जा सकती हैं। सारंग कोट पंहुच कर गाडी खडी करके काफी उंचाई तक पैदल जाना था। मैं चल पडा। काफी उपर जाकर एक बडा वाच टावर बनाया गया है। सौ डेढ सौ सीढियां चढ कर मैं वाच टावर के उपर भी पंहुच गया। इस वक्त 5.45 हो रहे थे। मैने गूगल पर सनराईज टाइम देखा,तो पता चला कि आज सूर्योदय 6.31 पर होगा। अभी 45 मिनट इंतजार करना था। मौसम काफी ठण्डा हो रहा था। मैं पैरों में स्लीपर और सिर्फ एक शर्ट पहन कर वहां पंहुचा था। ठण्ड महसूस हो रही थी,लेकिन कोई चारा नहीं था। ठण्ड के साथ में सूर्योदय का इंतजार करता रहा। लेकिन अचानक से आसमान पर बादलों ने कब्जा जमा लिया। सूर्यदेव को बादलों ने ढंक दिया। सूर्योदय का समय भी हो गया। लेकिन आसमान में सिर्फ बादल थे,सूरज नदारद था। हम वापस लौटने को हुए। मुझे लगा था कि अब हम सीधे होटल जाएंगे। गाडी में बैठने पर पता लगा कि हमारी नेपाली होस्ट उषा जी के किसी रिश्तेदार के घर पर ही नाश्ते की व्यवस्था है। पहले वहां जाएंगे,नाश्ता करेंगे और तब होटल लौटेंगे।


मैने तो मुंह भी नहीं धोया था। करीब तीन घण्टे रिश्तेदारी का मिलन चला। मैं भीतर भी नहीं गया। गाडी में ही सोता रहा। मेरा मूड और पेट दोनो खराब हो रहे थे। मैं बिना फ्रैश हुए चला गया था। लेकिन मेरे पास इंतजार करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। ना तो सूर्योदय देखने को मिला और उपर से सुबह भी खराब हो गई। खैर दस बजे हम होटल पर वापस लौटे। वापस लौट कर तैयार होते होते ग्यारह बज गए। आज का दिन पोखना घूमना था।  पोखरा भ्रमण की शुरुआत तो सुबह ही हो गई थी.......


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नेपाल यात्रा-3 नेपाली साहित्यकारों से पहली मुलाकात और चितवन नेशनल पार्क में शेरों के दीदार

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13 नवंबर 24 बुधवार

सुबह आठ बजे होटल के नीचे एक छोटे हाल में साहित्य संगम का कार्यक्रम शुरु हो गया। मैं साढे आठ पर तैयार होकर नीचे पंहुचा। रीता जी पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी नामक संस्था असम के तेजपुर में चलाती है। सारी योजना उन्ही की थी। चितवन के एक डेढ दर्जन साहित्यकार इस कार्यक्रम में मौजूद थे। स्वागत सत्कार के बाद भारत से गए हम छ: लोगों में से मुझे छोडकर सभी ने अपनी रचनाएं सुनाई। इसके बाद नेपाली साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं सुनाई। करीब दो घण्टे यह आयोजन चला। नेपाल के कई साहित्यकार हिन्दी में भी लिखते हैं। हमें भी कई पुस्तकें और प्रमाणपत्र भेंट किए गए।


कार्यक्रम के बाद अल्पाहार किया,मैने तो मटर की सब्जी और रोटी का भोजन ही कर लिया। 


आज हमें चितवन घूम कर शाम तक पोखरा पंहुचना है। चितवन में चितवन नेशनल पार्क है,जहां शेर,चीते गैण्डे जैसे वन्यप्राणी विद्यमान है। मैने सुझाव दिया कि नेशनल पार्क में जाने का कोई मतलब नहीं है,क्योकि दोपहर हो चुकी है और दोपहर को वन्य प्राणी विचरण नहीं करते। लेकिन फिर भी उषा तिवारी जी हमें लेकर पहले चितवन नेशनल पार्क के मुख्यद्वार पर लेकर गई। यहां कुछ फोटो विडीयो बनाकर हम लोग बीस हजारी ताल के गेट पर पंहुचे। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए एक-दो शेरों को पिंजरों में रखा गया है,ताकि पर्यटक शेरों का दीदार कर सके।


हम वहां पंहुचे। शेर को देखने के लिए टावर बनाया गया है। टावर के सामने शेर को रखने का स्थान बनाया गया है। वाच टावर पर चढकर हमने शेरों का दीदार किया। विडीयो बनाए। यहां पर सफेद शेर भी मौजूद था,जो कि दुर्लभ श्रेणी का प्राणी है।


अब यहां से आगे बढे। यहां दो नदियों त्रिशूरी और गण्डकी का संगम है,जिसे देवघाट कहा जाता है। इसे आदि प्रयाग भी कहते है। देवघाट पोखरा के रास्ते में ही पडता है। देवघाट को देखते हुए हम पोखरा के लिए बढ गए। पोखरा की दूरी मात्र 130 किमी थी। लेकिन बताया गया था कि सडक़ खराब है और काफी समय लग सकता है। देवघाट से आगे बढे,तो शुरुआत में सडक़ बढिया थी। तेज गति से गाडी चली। हम करीब ढाई बजे चितवन से पोखरा के लिए निकल गए थे।


रास्ता कहीं बेहद अच्छा था,तो कहीं बेहद खराब। कहीं चौडीकरण का काम चल रहा था। चितवन से पोखरा वाला यह रास्ता पृथ्वी राजमार्ग था। 


गूगल मैप लगातार दिखा रहा था कि हम साढे सात तक पोखरा पंहुचेंगे। जब पोखरा के नजदीक पंहुचे तो सडक़ और खराब हो गई। मुझे लगा था कि हम थोडा पहले पंहुच जाएंगे,लेकिन खराब रास्ते की वजह से आखिरकार पौने आठ बजे हम पोखरा में अपने होटल सी लैक पर पर पंहुचे।


आज चूंकि समय पर आ गए थे,तुमुल सिन्हा जी और मुझे एक ही कमरे में रहना था,इसलिए हमने शाम बहुत अच्छे से गुजारी। शाम को हमें बताया गया कि यहा का सनराइज बडा खुबसूरत होता है,लेकिन उसके लिए सुबह पांच बजे निकलना पडेगा। मैने साफ इंकार कर दिया। मुझे अपनी नींद खराब करके सूर्योदय नहीं देखना था। लेकिन रात के चर्चासत्र में सिन्हा जी ने मुझे चढा दिया। उन्होने कहा चलना ही पडेगा। मैने भी सोचा कि अगर एकाध घण्टे की बात है तो सुबह बिना फ्रैश हुए चले जाएंगे और लौट कर आएंगे तो सुबह के सारे कार्यक्रम निपटा लेंगे। सिन्हा जी के दबाव में मैने हां कह दिया।


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नेपाल यात्रा-2 खचाखच भरी गाडी और नेपाल का उबड खाबड महेन्द्र राजमार्ग

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13 नवंबर 24 बुधवार (रात 8.00 आईएसटी)

होटल सी लेक पोखरा 


दो दिन पहले ट्रेन में डायरी लिख रहा था,तब न्यू जलपाईगुडी नहीं पंहुचे थे। तब से लेकर आज अभी तक डायरी लिखने का मौका ही नहीं मिल पाया। आझ पोखरा पहुच कर अब डायरी लिखने का मौका मिला है। अब पूरे दो दिनों का लम्बी कहानी है,बल्कि तीन दिनों की।


11 नवंबर 

हमारी ट्रेन लेट होते होते आखिरकार 10.30 पर न्यू जलरपाईगुडी स्टेशन पंहुची। कार्यक्रम और यात्रा की होस्ट रीता जी खुद अभी एनजेपी नहीं पंहुच पाई थी। उन्होने बताया कि हमारा होटल सिलीगुडी में है और गुगल मैप के मुताबिक सिलीगुडी एनजेपी स्टेशन से महज  किमी दूर है। हमे होटल स्वस्तिक में जाना था। आटो वाले 6 किमी का छ:सौ मांग रहे थे। फिर एक हाथ रिक्शे वाला आया जो दो सौ रु. में ले जाने को राजी था। मेहनतकश की मदद हो जाएगी यही सोचकर हम उसी के साथ चल पडे। स्टेशन से करीब दो सौ मीटर आगे जाकर हाथ रिक्शा खडे थे। वहां पंहुच कर पता चला कि हमे तय करने वाला व्यक्ति तो दलाल था,वह खुद साइकिल रिक्शा नहीं खींचता था। उसने एक रिक्शे वाले को बुलाया।


वैदेही साइकिल रिक्शा में पहली बार बैठ रही थी।उसे डर भी लग रहा था। लेकिन हम साइकिल रिक्शा में सवार हुए। हमें स्वस्तिक होटल पंहुचने में करीब चालीस मिनट का वक्त लगा। 11.10 पर हम होटल के अपने कमरे में पंहुचे। पंहुचे ही थे कि एक सज्जन आकर हमसे मिले,वे भी हमारी ही तरह इस यात्रा में शामिल होने के लिए भोपाल से आए थे,नाम था तुमुल सिन्हा। प्रारंभिक परिचय हुआ। रीता जी को होटल पंहुचते पंहुचते रात के 12 बज गए थे। उन्होने आते ही बताया कि सुबह पांच बजे यहां से चल देना है। कुल मिलाकर डायरी लिखने का समय नहीं बचा था। जल्दी उठना था इसलिए सुबह साढे चार का अलार्म लगा कर सो गए। 


12 नवंबर मंगलवार

सुबह जल्दी निकलना था,इसलिए साढे चार बजे का अलार्म लगा कर सोए थे। जल्दी उटकर नहा धोकर निकलते निकलते भी साढे पांच बज गए थे,लेकिन मुझे देर नहीं हुई थी।अभी बाकी के लोग भी आ ही रहे थे।


अब मैने देखा कि हमारी यात्रा के लिए एक इनोवा आई थी। इन इनोवा में जाने वालों की संख्या देखकर मुझे थोडा डर लगा। यात्रा की आयोजक रीता सिंह और उनकी छोटी बहन,इसके अलावा अरुणाचल के तेजपुर से आई गुम्फी जी अपने बेटे के साथ,मैं और वैदेही और तुमुल सिन्हा जी और गाडी का ड्राइवर प्रदीप। तो इस तरह अभी कुल 8 लोग हो चुके थे। जब गाडी में बैठने की बात आई तो सबसे पहले मैने बडा दिल दिखाया और सबसे पीछे की सीट पर बैठने को राजी हो गया। मेरे साथ तुमुल सिन्हा जी भी पीछे आ गए।

अब हम बढ चले सिलीगुडी से नेपाल बार्डर काकर भिट्टा के लिए। सिलीगुडी से करीब 40 किमी पर नेपाल की सीमा है। नेपाल की सीमा पर पंहुचते ही वहां के इमिग्रेशन आफिस में पंहुचे। एक व्यक्ति हमारे पास आया,सभी समझे यह कोई सरकारी आदमी होगा। उसने हमे कब्जे में लिया और लेकर चला,सब औपचारिकताएं पूरी करने। पता चला वह एक एजेन्ट है। सबसे पहले वह हमें ले गया करेन्सी एक्सचेंज करने। भारतीय रुपए और नेपाली रुपए में अंतर है। भारत के सौ रुपए नेपाल के 160 रुपए होते है। हमने बारह हजार बदलवाए जो कि बीस हजार से कुछ अधिक हुए। मुद्रा बदल गई। फिर वो दलाल औपचारिकताएं पूरी करने ले गया। रीता सिंह जी जो दुपट्टे नेपाली साहित्यकारों को भेंट करने लाई थी,उस पर उन्हे टेक्स देना पड गया। नेपाली प्रवेश का वास्तविक शुल्क तीन हजार रु. का था,लेकिन दलाल के चक्कर में कुल 8 हजार देना पड गए। 


खैर यहां से आगे बढे। हमारी मंजिल थी चितवन,जो कि करीब 425 किमी दूर था। इस वक्त सुबह के साढे नौ हो चुके थे। यहां से आगे बढे। ये महेन्द्र राजमार्ग था,जिस पर हम चल रहे थे। सडक़ के चौडीकरण का काम चल रहा था। इस वजह से दो तीन किमी चलते ही कोई ना कोई डायवर्शन आजाता था। 

हमें लम्बी दूरी तय करना थी। करीब बारह बजे रास्ते में दमक नामक एक जगह पर रुक कर नाश्ता करना था। यहीं मोबाइल की सिम भी लेना थी। मोबाइल की सिम लेने जहां रुके वहीं नाश्ते की चिन्ता भी कर ली। समय तो भोज नका ही हो रहा था। मैने तो दो आलू पराठे दबा लिए ताकि दिन भर का काम हो जाए। यहां सिम लेने का भी काम पूरा हो गया। नेपाल में एनसेल कम्पनी की सिम चलती है। सभी ने दो सौ रुपए में सात दिन के लिए एनसेल की सिम मोबाइल में लगा ली। दो सौ रुपए में वाइस काल नहीं मिलती,केवल सिमकार्ड और डाटा मिलता है। वाइस काल के लिए 7 दिन का 270 रु. का पैक मिलता है,जो कि मात्र 70 मिनट टाक टाइम सात दिनों के लिए मिलता है। मैने टाक टाइम भी ले लिया। नाश्ते के नाम पर भोजन किया और यहां से आगे बढे। 


अब तक मैं गाडी में पीछे बैठा था,लेकिन मेरे पैरो की हालत खराब हो गई थी। मैने कहा मैं पीछे नहीं बैठ सकता। सीट बहुत नीची है। मैं अगली सीट पर आ गया। यहां से चितवन की दूरी करीब तीन सौ किमी थी और करीब आठ घण्टे का वक्त लगना था। 


जिस रोड पर हम चल रहे थे,वह महेन्द्र राजमार्ग था,जो चितवन होते हुए सीधे काठमाण्डू तक जाता है। करोड के चौडीकरण के कारण जगह जगह डायवर्शन थे और रोड की हालत बेहद खराब थी। चलने की गति बेहद धीमी थी। दोपहर के दो बज चुके थे। मेरे अलावा सभी को भूख लग रही थी,लेकिन रीता जी ने कहा कि भोजन बर्दीबास नामक स्थान पर करेंगे,जो कि अभी करीब सौ किमी दूर था। यानी कम से कम दो घण्टे और लगना थे। बताया गया कि थकाली भोजनालय में बेहतरीन नेपाली खाना मिलता है। थकाली भोजनालय में थकाली शब्द एक जाति विशेष का सूचक है जो नेपाली भोजन को विशेष प्रकार से बनाते है। जैसे हमारे यहां सखवाल ब्राम्हणों को भोजन बनाने में निपुणता हासिल है,उसी तरह नेपाल में थकाली किचन की महिमा है। आखिरकार चार बजते बजते बरदीबास आया और यहां पहली मंजिल पर एक थकाली भोजनालय था,जहां मेरे अलावा सभी ने भोजन किया। 


हमें चितवन से करीब तीस किमी पहले नारायण घाट नामक स्थान पर रुकना था। रास्ते में कुछ स्थानों पर सडक़ की हालत अच्छी भी थी,इसलिए रात करीब साढे नौ बजे हम नारायण घाट के अपने होटल जमघट में पंहुच गए। ये पूरा रास्ता मैदानी इलाके में था,इस पूरे रास्ते में पहाड आदि नहीं थे। 

नारायण घाट पंहुचने पर रीता जी की एक साहित्यकार मित्र ऊषा तिवारी जी ने साहित्य संगम का कार्यक्रम शाम को पांच बजे रखा था,जिसे रद्द करके अब अगले दिन यानी कल सुबह 8 बजे रखा है। सुबह आठ बजे तैयार होना है इसलिए जल्दी उठना होगा।


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यात्रा वृत्तान्त-47 नेपाल यात्रा-भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन

 (9 नवंबर 2024 से 20 नवंबर 2024)


11 नवंबर 24 सोमवार  (दोपहर 12.45)

पटना-न्यू बरौनी स्टेशन के बीच

कोच न. बी-1-20 गांधीधाम-कामाख्या एक्सप्रेस

हमारी यह यात्रा शनिवार,रविवार की मध्यरात्रि 3 बजे (तारीख हो चुकी थी 10 नवंबर) रतलाम रेलवे स्टेशन से शुरु हुई। इस यात्रा में मैं और वैदेही भारत और नेपाल के कुछ साहित्यकारों द्वारा आयोजित की गई साहित्यिक यात्रा में भाग लेने के लिए नेपाल जा रहे है। ट्रेन से हम आज रात नौ बजे तक न्यू जलपाईगुडी (प.बंगाल) रेलवे स्टेशन पंहुचेंगे और वहां से फिर सडक़ मार्ग से नेपाल की छ: दिवसीय यात्रा पर निकलेंगे। मेरी यह यात्रा पिछली यात्रा के ठीक 110 दिनों के बाद हो रही है। इस 110 दिनों में काफी कुछ बदल गया है। 


पिछली यात्रा श्रीखण्ड कैलास की थी,जहां से हम 22 जुलाई को लौटे थे। उसके कुछ ही दिनों के बाद आशुतोष के पिताजी रामकृष्ण नवाल जी स्वर्गवासी हो गए। कुछ और दिन गुजरे,17 अगस्त को दादा (पिताजी गोपालराव कोठारी) स्वर्गवासी हो गए। इसके बाद दशहरा दीपावली की व्यस्तता और इसके तुरंत बाद ये यात्रा। 


इस यात्रा की तैयारी सितम्बर अंत से ही शुरु हो गई थी। वैदेही की मित्र रीता सिंह तेजपुर आसाम में कार्यरत है। पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी नामक संस्था चलाती है। इसी संस्था के बैनर तले भारत-नेपाल सांस्कृतिक यात्रा और साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन नेपाल में हो रहा है। यह आयोजन नेपाल के चितवन,पोखरा और काठमाण्डू में होगा।


रेल के टिकट सितम्बर अंत में करवा लिए थे,लेकिन वेटिंग के टिकट थे। ट्रेन 9 की रात को चलना थी,तो मैने सोचा कि 8 की दोपहर वीआईपी करवा लेंगे। 8 नवंबर की दोपहर डीआरएम आफिस पंहुचा। वहां जाकर पता चला कि इस ट्रेन में रतलाम से वीआईपी कोटा ही नहीं है। फिर डीआरएम आफिस से गांधीधाम मैसेज करवाया। मैसेज करवाने के बाद उम्मीद थी कि रिजर्वेशन कन्फर्म हो जाएगा। 8 की शाम को अचानक मैसेज आया कि 1 बर्थ कन्फर्म हो गई है। मुझे लगा कि ये रुटीन में कन्फर्म हो गई है। अब बची हुई एक बर्थ वीआईपी से कन्फर्म हो जाएगी। लेकिन 9 की दोपहर को पता लगा कि जो एक बर्थ कन्फर्म हुई थी,वह वीआईपी कोटे से ही हुई थी। रतलाम का चार्ट 9 की शाम को बनेगा तब पता चलेगा कि दूसरी बर्थ का क्या हुआ है? लेकिन शाम को जब चार्ज बना तो दूसरी बर्थ वेटिंग में ही रह गई थी। अब बडी चुनौती ये थी कि 42 घण्टों का लम्बा सफर दो लोगों को एक ही बर्थ से पूरा करना था। हमने सोचा,देखते है क्या होता है?


रात को पौने तीन बजे चिन्तन ने हमें कार से स्टेशन पर छोडा। ट्रैन ठीक समय पर आ गई थी। हम अपनी बर्थ पर पंहुचे। सीटों के नीचे सामान जमाया और एक ही बर्थ पर आडे तिरछे होकर पड गए। सुबह करीब साढे छ: बजे सामने की लोअर बर्थ पर सौ रहे सज्जन जाग गए और उन्होने कहा कि मैं उनकी बर्थ पर सो सकता हूं। फिर आराम से 9 बजे तक सोते रहे। इस तरह ट्रेन की पहली रात कट गई। अब चुनौती दूसरी रात गुजारने की थी। हमारे साथ दो सज्जन आरपीएफ के अधिकारी थे,जो किसी जांच के लिए गौहाटी जा रहे थे। उन्होने बताया कि लखनऊ से कुछ सीटें खाली होगी। रात को लखनऊ में टीटी से बात की। 500 का नोट दिया तो उसने सुबह तक के लिए बी-4 में 8 नम्बर बर्थ दे दी। इधर हमारे कम्पार्टमेन्ट में सामने की अपर बर्थ खाली थी। पहले मैं वहीं पर सौ गया। रात साढे बारह पर अयोध्या और सुबह साढे पांच बजे बनारस आना था। रात को सोया तो सुबह बनारस में उस बर्थ के यात्री ने आकर उठाया। फिर मैं उस बर्थ पर चला गया जो टीटी ने मुझे दी थी। सुबह नौ बजे तक मैं आराम से सोया। 


कल ट्रेन राजस्थान से उत्तर प्रदेश में गई थी। कानपुर लखनऊ,अयोध्या,वाराणसी,आदि स्थानों से होते हुए आज ट्रेन ने बिहार में प्रवेश किया। फिलहाल ट्रेन बिहार में चल रही है और हम पटना से न्यू बरौनी,खगरिया,कटिहार होते हुए न्यू जलपाईगुडी पंहुचेंगे। ट्रेन चल रही है। अभी दो घण्टे की देरी से चल रही है। देखते है हम कितने बजे न्यू जलपाईगुडी पंहुचते हैं।


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Saturday, January 11, 2025

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-10/ जहा गुजारी पहली रात वही आखरी रात भी


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21 जुलाई 2024 रविवार (रात 11.45)

प्रिन्स गेस्ट हाउस सवाई माधोपुर (राज.)


इस वक्त हम उसी होटल में रुके हैं जहां यात्रा की पहली रात गुजारी थी। कमरे में एसी चल रहा है और कमरा अच्छे से ठण्डा हो चुका है।बाहर बहुत गर्मी  है। हम गर्म माहौल में से ठण्डक में आए हैं। अच्छी फीलींग है।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-9 /शानदार बुग्याल बागा सहरन की एक रात


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20 जुलाई 2024 शनिवार (रात10.40)

होटल एवलांच कच्ची घाटी शिमला


इस वक्त मैं शिमला के बाहरी इलाके कच्ची घाटी में होटल एवलांच में हूं और सुबह यहां से जल्दी निकलने की इच्छा के साथ इस वक्त डायरी लिख रहा हूं। 





श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-8/ 9 किमी की ढलान के बाद बराठी नाले में अद्भुत स्नान


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19 जुलाई शुक्रवार (रात 11.46)

20 जुलाई 24 शनिवार (प्रात: 9.00)

के-2 हाईट्स बागा सहरन


इस वक्त हम जाओ गांव से 14 किमी उपर बागा सहरन नामक स्थान पर सुबह की तैयारियों में जुटे हैं। हम यहां बीती शाम 7.30 पर पंहुचे थे। रात 11.46 पर डायरी लिखने की कोशिश की थी,लेकिन थकान और नींद इतनी ज्यादा थी कि 4 लाइन भी नहीं लिख पाया। इसलिए अब कल का पूरा घटनाक्रम आज लिख रहा हूं।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-7/ लगातार 19 घंटो की ट्रेकिंग और श्रीखंड कैलास के दिव्य दर्शन


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18 जुलाई 2024 गुरुवार (शाम 5.45)

थाचडू बेस कैम्प.श्रीखण्ड यात्रा मार्ग


हम अब वापसी की यात्रा कर रहे है और इस वक्त भीमद्वार से चल कर थाचडू आ चुके हैं। आज हम 14 किमी चल चुके हैं। 

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-6 श्रीखंड कैलास के लिए आधी रात को ट्रेकिंग


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आठवां दिन


17 जुलाई 2024 बुधवार (सुबह 9.15)

भीमद्वार बैस कैम्प


मैं,आशुतोष और प्रकाशराव हम तीनो इस वक्त भीमद्वार के उसी टेण्ट में मौजूद है,जहां बीती रात हम सोये थे। 

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-5/ ग्लेशियर को पार करके आ गए भीमद्वार


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सातवां दिन

16 जुलाई 2024 मंगलवार (दोपहर 3.00)

भीमद्वार (श्रीखण्ड कैलास यात्रा मार्ग)


इस वक्त भीम द्वार में जबर्दस्त तेज बारिश हो रही है और भाग्यशाली है कि बारिश तेज होने से पहले टेण्ट में आ चुके है। आज की हमारी यात्रा भीमतलाई से सुबह सवा आठ बजे शुरु हुई थी। भीमतलाई से अगली पहाडी के टाप पर हमे कुंशा कैम्प नजर आ रहा था। लेकिन कुंशा तक पंहुचने के लिए हमे सीधे पहाड से नीचे उतरना था।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-4 / काली टॉप चढ़ कर उतरे और पहुंचे भीम तलाई


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छठा दिन 

15 जुलाई 2024 सोमवार (अपरान्ह 3.00)

भीम तलाई (अपर)


इस वक्त हम अपर भीमतलाई में एक टेण्ट लेकर रुक गए है। हमने आज सुबह 7.50 पर थाटीविल से चलना प्रारंभ किया था।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-3 - 12 घंटो में 12 किमी की खड़ी चढ़ाई


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पांचवा दिन 

14 जुलाई 2024 रविवार (शाम 6.50)

थाटीविल (श्रीखण्ड कैलास यात्रा मार्ग)


इस वक्त हम थाटी विल की एक दुकान में रात्रि विश्राम के लिए रुके हुए हैं। आज हम सुबह साढे छ: बजे से 12 घण्टे लगातार चल कर कुल 12 किमी की दूरी तय करके यहां पंहुचे है।

श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा-2 पहाड़ो के बीच गाड़ी का सफर

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12 जुलाई 2024  शुक्रवार (रात 10.45)

बुशहर सदन रामपुर बुशहर (हिप्र)


इस वक्त हम रामपुर बुशहर के इस सरकारी होटल या यूं कहे कि रेस्ट हाउस में है। हम यहां 7.45 पर पंहुच गए थे। बिना मशक्कत के बुशहर सदन मिल गया और यहां तीसरी मंजिल के दो कमरों में हम टिक गए। हम रतलाम से अब तक 1250 किमी दूर आ चुके है। 

यात्रा वृत्तान्त-46 श्रीखण्ड महादेव कैलास यात्रा


(10 जुलाई 24 से 22 जुलाई 24 तक)

शुरूआती सफर 

10 जुलाई 2021 बुधवार (रात 11.30)

प्रिन्स गेस्ट हाउस (सवाई माधोपुर राज.)


हमारी ये यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। इस बार लक्ष्य है श्रीखण्ड महादेव का दर्शन करना। इस वक्त हम सवाई माधोपुर से कुछ ही दूर यहां प्रिन्स गेस्ट हाउस में रुके है। एटलेन एक्सप्रेस वे ठीक सामने है,कल सुबह इसी एटलेन से दिल्ली और आगे का सफर करेंगे।

Saturday, September 21, 2024

अयोध्या-3 /रामलला की अद्भुत श्रृंगार आरती


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 12 मार्च 2024 मंगलवार (रात्रि 9.45) 

साबरमती एक्सप्रेस कोच न. ए-2-43  

अयोध्या की यात्रा अब समाप्ति पर है। हम रतलाम लौट रहे हैं और इस वक्त साबरमती एक्सप्रेस रतलाम की ओर दौड रही है।  

आज की शुरुआत बेहद खास रही।ये दिन बडा खास रहा और इसकी जानकारी कल रात ही मिल गई थी। कारसेवक पुरम में कल सुबह गए थे। वहां कई लोगों से परिचय हुआ था। रात को कारसेवक पुरम से अभिनव नामक युवक का फोन रोचन के पास आया कि क्या आप लोग सुबह आरती में शामिल होना चाहते है? अन्धा क्या चाहे? दो आंखे। कौन इंकार कर सकता था। उन्होने सभी के आधार साफ्ट कापी में मंगवाए और रोचन से कहा कि आपलोग सुबह पांच बजे मन्दिर के मुख्य द्वार पर पंहुच जाएं।   

अयोध्या-2 /राम मन्दिर के लिए रामशिला की भेंट और नन्दीग्राम का भ्रमण

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  11 मार्च 2024 सोमवार,रात 9.15 

जानकी महल अयोध्या धाम  

आज के व्यस्ततम दिन का समापन होने को है। मैं डायरी के साथ हूं और बाकी लोग भोजन कर रहे हैं।

 कल हमें बताया गया था कि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपतराय जी सुबह 8 और 8.30 के बीच मिल सकते है। उन्हे राम शिला भेंट करना थी,इसलिए सुबह 8 बजे यहां से निकलने का इरादा था।  लेकिन प्रतिमा ताई,रोचन,वैदेही और नलू आत्या सुबह 6 बजे मन्दिर के पट खुलते ही रामलला का फिर से दर्शन करना चाहते थे। इसलिए ये चारो सुबह पौने छ: बजे दर्शन करने के लिए रवाना हो गईं। उम्मीद थी कि ये लोग आठ बजे के पहले लौट आएंगी। लेकिन मन्दिर के पट 6 बजे नहीं बल्कि सात बजे खुलते है,इसलिए ये सभी साढे आठ बजे दर्शन करके वापस लौटी।

यात्रा वृत्तान्त-45/ प्राणप्रतिष्ठा के बाद अयोध्या यात्रा (8 मार्च 2024 से 13 मार्च 2024)


 भव्य जन्मभूमि मन्दिर में रामलला की आरती 


 9 मार्च 24 शनिवार (रात 10.45) 

जानकी महल नया घाट अयोध्या धाम  


अयोध्या की पिछली यात्रा 21 दिसम्बर 23 को रतलाम से शुरु हुई थी और 24 दिसम्बर को हम अयोध्या पंहुच गए थे। 26 दिसम्बर को सुबह करीब नौ बजे अयोध्या से वापसी के लिए निकल गए थे। इस हिसाब से अयोध्या की  पिछली यात्रा के ठीक 73 दिन बाद मैं फिर से अयोध्या आ चुका हूं।  अयोध्या की ये यात्रा पूरी तरह पारिवारिक है। सौ.आई और दादा को श्री राम लला के दर्शन करवाने के लिए ये यात्रा की जा रही है। इस यात्रा में मेरे अलावा,वैदेही,चिन्तन,प्रतिमा ताई,रोचन,नलू आत्या,नारायण और आरती वहिनी इस तरह हम कुल दस लोग अयोध्या पंहुचे है।

Wednesday, September 18, 2024

यात्रा वृत्तान्त-44/ अयोध्या की एक संक्षिप्त यात्रा (21 दिसम्बर 2023 से 27 दिसम्बर 2023 )

22 दिसम्बर 2023 शुक्रवार (रात 1.00)

 पप्पू एण्ड पप्पू रिजार्ट,सोनकच्छ 


 पिछली यात्रा आदि कैलास वाली 12 सितम्बर 23 को समाप्त हुई थी। फिर विधानसभा चुनाव आ गए। इस यात्रा की कोई योजना नहीं थी। 13 दिसम्बर को मलय,मिजोरम से आने वाला था,उसे लेने इ्नदौर गए। समय था,इसलिए एयरपोर्ट के नजदीक बाबा मौर्य के घर चले गए। बैठे,बातें हुई। तो बाबा ने कहा कि राम मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा से पहले एक बार अयोध्या चलना चाहिए। मैने फौरन हां कह दिया। रात दो बजे रतलाम लौटे थे। लेकिन अगले ही दिन बाबा का फोन आ गया कि अयोध्या चलना ही है। मैने भी हां कह दिया। फिर राजेश घोटीकर को भी चलने के लिए तैयार किया। 

Monday, May 6, 2024

जारी है जुमलो के जरिये जनता का जनादेश जीतने का जतन

 -तुषार कोठारी


देश की सरकार बनाने के आम चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके है। पिछले कई दशकों में शायद यह पहली बार ही हो रहा है कि देश भर में बहस हारने जीतने को लेकर नहीं बल्कि सिर्फ इस बात को लेकर हो रही है कि मोदी जी चार सौ पार करेंगे या नहीं। यानी कि चुनाव में हार जीत कोई मुद्दा ही नहीं है। जीत हर कोई मान चुका है अब मुद्दा सिर्फ संख्या का है।

Sunday, April 14, 2024

अनुच्छेद 370 हटाने के कारण मोदी को 370 का पुरस्कार देने को तैयार है मतदाता

 -तुषार कोठारी 


 देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव का शोर है और भाजपा समेत सारे राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में जुटे है। इन चुनावों में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का मुद्दा भी सुनाई दे रहा है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के मुद्दे पर भाजपा को छोडकर तमाम राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए है। विपक्षी दलों की हालत सांपु छछून्दर वाली हो रही है। यहां तक कि भाजपा के नेता विपक्षी दलों को खुली चुनौती भी दे रहे है कि अगर उनमें दम हैं तो वे कहें कि वे अनुच्छेद 370 फिर से ले आएंगे। भाजपा के रणनीतिकार जानते है कि किसी विपक्षी नेता की अब ये ताकत नहीं है कि वे अनुच्छेद 370 को फिर से लाने की बात कह सके। यहां तक कि कश्मीर दोनो प्रमुख राजनीतिक दल नेशनल कांफ्रेंस  और पीडीपी भी अब इस मुद्दे पर मौन साध कर बैठ गए हैं।  आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? 

Sunday, December 17, 2023

आदि कैलास यात्रा-(अंतिम)- बारिश और भू स्खलन के बीच वापसी और नरी सैमरी माता के दर्शन

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10 सितम्बर 23 रविवार (सुबह 8.20) 
होटल हिमालय दर्र्शन बैरिनाग
 

 इस वक्त हम निकलने की तैयारी कर रहे हैं। प्रकाश राव अभी अभी उठे है। उनका स्वास्थ्य अब वे ठीक बता रहे हैं। आशुतोष और मेरा स्नान अभी बाकी है। दूसरे कमरे में टोनी काफी देर से जागा हुआ है,दशरथ जी को मैं उठा कर आया हूं।  कल दोपहर से हल्की बारिश शुरु हो गई थी। कभी धीमी,कभी तेज। इस वक्त भी बारिश हो रही है। होटल के कमरे के बाहर पूरे पहाड का शानदार नजारा दिखाई देता है। लेकिन बारिश हो रही है,तो बादलों ने पूरे इलाके को ढंक लिया है। बादलों की वजह से कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। होटल का व्यू मौसम साफ होता तो बेहद शानदार होता।

आदि कैलास यात्रा-7 पाताल भुवनेश्वर,जहां गुफा में समाया है सारा ब्रम्हाण्ड

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9 सितम्बर 2023 शनिवार (रात 10.15) 
होटल हिमालय दर्शन बैरिनाग

इस वक्त हम सैराघाट से कुछ- किमी दूर इस हिमालय दर्शन होटल में ठहरे है और भोजन करके सोने की तैयारी में है।  आज की सुबह धारचूला में हुई थी। हमारी गाडी नेपाल सीमा के पुल के पास की पेड पार्किंग में खडी थी। करीब पौने नौ बजे टोनी और दशरथ जी तैयार होकर गाडी लेने निकल गए। इधर हम लोग जल्दी जल्दी तैयार हुए ताकि गाडी आते ही तुरंत अपना लगेज गाडी में जमाकर रवाना हो सके। प्रतीक को फोन किया था,वह भी आ गया।  कुछ ही देर में दशरथ जी और टोनी गाडी लेकर आ गए। गाडी मेें सारा सामान जमाया। पहले ही तय कर लिया था कि नाश्ता धारचूला से बाहर निकल कर करेंगे। 

आदि कैलास यात्रा-6 प्रकृति का चमत्कार ओम पर्वत और काली नदी का उद्गम स्थल कालापानी

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9 सितम्बर 2023 शनिवार,सुबह 9.15
 होटल आदि कैलास धारचूला  

इस वक्त हम धारचूला से वापसी की यात्रा के लिए तैयार हो रहे है। लगभग सभी लोग तैयार हो चुके है। टोनी और दशरथ जी गाडी लेने के लिए जा रहे है।,ताकि हम हमारा लगेज गाडी में जमा कर निकल सके।  कल का सारा दिन डायरी ही नहीं लिख पाया,इसलिए आज लिख रहा हूं-

आदि कैलास यात्रा-5 महादेव के निवास की हूबहू प्रतिकृति है आदि कैलास

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 7 सितम्बर 23 गुरुवार (जन्माष्टमी)
 शाम 5.00 प्रतीक होम स्टे नाबी 

इस वक्त हम आदि कैलास,पार्वती सरोवर,गौरी कुण्ड और शिव मंदिर के दर्शन करके लौट चुके हैं।  


 आज सुबह 6.00 बजे नींद खुल गई थी। सभी लोग जल्दी उठ गए थे। ये शायद हाई अल्टी का असर है। कल शाम को जब हम बुधी पंहुचे थे,वहीं से हाई अल्टी शुरु हो गई थी। वहीं हम लोगों ने गर्म कपडे निकाल लिए थे। यहां नाबी में तो जबर्दस्त ठण्ड है।  तो सुबह सभी लोग जल्दी उठ गए थे,इसलिए जल्दी निकलने का तय किया। करीब साढे सात तक सभी तैयार हो गए। प्रतीक की माताजी ने गर्मागर्म पुडी और लौकी की सब्जी,हरी मिर्ची की चटनी के साथ नाश्ते में खिलाई। फिर चाय पी और करीब 8.10 पर आदि कैलास के निकल पडे।  

आदि कैलास यात्रा-4 आखिर मिल ही गया इनर लाइन परमिट

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06 सितम्बर 2023 बुधवार (सुबह 9.30)
 होटल आदि कैलास धारचूला 

इस वक्त मैं पूरी तरह तैयार हो चुका हूं। दशरथ जी भी तैयार है। नवाल सा.स्नान कर रहे हैं। पंवार सा.अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।  आज का दिन हमें परमिट का इंतजार करना था,इसलिए सुबह से ही बोरियत हो रही थी।  सुबह 6.30 पर नींद खुल गई थी। उठने की इच्छा नहीं थी,सोने का मन नहीं था। इसी अन्तदर््वन्द में मैं जैसे तैसे उठा। बहुत धीरे धीरे नित्यकर्म निपटा रहे थे कि अचानक दशरथ जी ने प्रस्ताव रखा कि जब करने को कुछ है ही नहीं तो नारायण आश्रम हो आते हैं।

आदि कैलास यात्रा-3 नेपाल सीमा से सटे धारचूला में मालवा के दाल बाफले

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04 सितम्बर 2023 सोमवार (रात 11.45) होटल कैलाश धारचूला   

इस वक्त मै धारचूला के इस होटल कैलाश में सोने की तैयारी में हूं।

आज सुबह आईटीबीपी के रेस्ट हाउस से करीब साढे दस बजे निकले। रास्ता सिर्फ 90 किमी यानी चार घण्टे का है। हमारे पास पूरा दिन था। रास्ते में एक जगह रुक कर आराम से फोटोग्राफी भी की। बेहद धीमे चलने के बाद भी दोपहर ढाई बजे धारचूला पंहुच गए। प्रतीक को फोन किया। वह रोड पर इंतजार करता हुआ मिला। प्रतीक से 2016 के बाद 7 साल बाद मुलाकात हुई। वह हमारे साथ हो गया।   इस वक्त सभी को भूख लग आई थी। जहां गाडी खडी की थी, वहां नजदीक ही एक होटल था। प्रतीक ने कहा पलहे आप होटल देख लो। पहला होटल देखा,फिर बगल वाला दूसरा देखा। दूसरा पसन्द आ गया। वहां रुकने का तय कर रहे थे। इसी बीच आशुतोष के पास एक बन्दे का फोन आया कि आपको गाडी चाहिए। आईजी सा. के मेहमान हो,तो गाडी के लिए मुझे बोला गया है। वो बन्दा राहूल था। जिसे प्रतीक भी जानता था। 

आदि कैलास यात्रा-2 नैनीताल-शक्तिपीठ,जहां गिरी थी देवी सती की बाईं आंख

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03 सितम्बर 2023 शनिवार (सुबह 7.50) 
होटल सुकून स्टे नैनीताल   

मेरी नींद सुबह 6.30 पर खुल गई थी। थोडी देर बाद आशुतोष भी उठ गया। बाकी के तीनो मित्र दूसरे कमरे में है और देरी से उठे है। हमने रात को तय किया था कि सुबह नौ बजे तैयार होकर निकलेंगे।  आज दोपहर तक नैनीताल घूम घाम कर निकल जाएंगे और पिथौरागढ जाकर रुकेंगे। गुंजियाल सा ने पिथौरागढ रुकने का सुझाव दिया है। कल यानी सोमवार को धारचूला पंहुच जाएंगे।  अब स्नान की तैयारी है। आज विडीयो बनाने की भी योजना है। अब तक कुछ विडीयोज बनाए है,लेकिन चैनल पर अपलोड करने जैसे विडीयो नहीं है।आज नैनीताल का एक विडीयो बनाकर चैनल पर अपलोड करने की इच्छा है।

यात्रा वृत्तान्त- 43 महादेव के निवास कैलास की प्रतिकृति आदि कैलास के चरणों में

  (01 सितम्बर 23 से 12 सितम्बर 23 तक)  

आदि कैलास यात्रा-1 मात्र 58 दिनों के बाद फिर से यात्रा पर... 

 1 सितम्बर 2023 शुक्रवार (रात 11.55) फिरोजपुर झिरका (हरियाणा) 


 पिछली यात्रा यानी लेह लद्दाख कश्मीर और हिमाचल की यात्रा 3 जुलाई को सुबह रतलाम पंहुच कर समाप्त हुई थी। सारे मित्रों का दबाव था कि 15 अगस्त को अगली यात्रा प्रारंभ करना है,लेकिन एडीजी गुंजियाल सा.ने लेह में कहा था कि यात्रा सितम्बर में प्रारंभ करना। दशरथ जी और प्रकाश जी पंवार को बडी मशक्कत से समझाया कि 1 से 15 सितम्बर तक डायरी में नो डेट लिख लें। मेहनत मशक्कत के बाद यह तय हो गया कि 31 अगस्त को रतलाम से निकलेंगे।  तो इस हिसाब से पिछली यात्रा के मात्र 58 दिन बाद अगली यात्रा तय थी। स्थान भी तय कर लिया था कि आदि कैलास जाएंगे। यात्री पांच थे। मैं दशरथ जी प्रकाश राव संतोष जी और आशुतोष नवाल जी।

Friday, September 29, 2023

सिन्धु दर्शन यात्रा-8 रघुनाथ मंदिर की परिक्रमा और बावे वाली माता के दर्शन

 30 जून 2023 शु्क्रवार (रात 11.55) 

 होटल वरमन लाज (जम्मू)  


इस वक्त मैं जम्मू की वरमन लाज में अब सोने की तैयारी में हूं और सोने से पहले आज का घटनाक्रम लिख रहा हूं।  मेरा अंदाजा था कि सुबह 8 बजे गाडियां श्रीनगर से निकल जाएगी। 8.20 पर गाडियां रवाना हो गए। गाडियां चली और थोडी ही देर बाद मुझे नींद आ गई।  एकाध घण्टे बाद जब नींद खुली,तो पता चला कि सिन्धु दर्शन यात्रियों का बाकायदा कानवाय चल रहा है। बाकी का सारा ट्रैफिक रोका हुआ था। सिन्धु दर्शन की बसें और कारें निकाली जा रही थी।  श्रीनगर से निकलने पर अनन्तनाग तक आतंकवाद का डर बताया जाता है,हांलाकि अब ये सब नदारद हो चुका है,लेकिन चूंकि एक जुलाई से अमरनाथ यात्रा प्रारंभ हो रही है। सुरक्षा बल सिन्धु यात्रा के बहाने सुरक्षा व्यवस्था की रिहर्सल कर रहे थे। 

सिन्धु दर्शन यात्रा-7 श्रीनगर में सबसे ऊँची पहाड़ी पर है आदिगुरु शंकराचार्य

 29 जून- यानी आज की सुबह हम करीब साढे छ: बजे उठे। देर रात को यह तय हुआ था कि श्रीनगर की लोकल साइट सीइंग यात्रा समिति द्वारा कराई जाएगी। सुबह साढे सात पर नाश्ता करके सुबह आठ बजे बस से निकलना था। हम जल्दी तैयार हुए और पोहे व ब्रेड पडा का नाश्ता करके साढे आठ पर बस में सवार हो गए। 

सिन्धु दर्शन यात्रा-6 तोलोलिंग और टाइगर हिल के पास ही है कारगिल वॉर म्यूजियम

 28 जून 23 बुधवार  


सुबह मुझे लगा था कि इतनी जल्दी कैसे निकल पाएंगे,इसलिए मैं कुछ आराम से उठा था। धीरे धीरे तैयार हो रहा था। पता चला कि सारे सहयात्री सुबह 6.30 पर तैयार होकर नाश्ता करने पंहुच गए। मुझे तैयार होते होते 7.20 हो चुके थे। इस समय तक सारे सहयात्री बस में पंहुच गए थे। मैने झटपट जैसे तैसे दो पुडी खाई और बैग लेकर बस में पंहुच गया।   ठीक 8.10 पर बस कारगिल से चल पडी। करीब डेढ घण्टे बाद द्रास में स्थित कारगिल वार म्यूजियम पंहुच गए। 

सिन्धु दर्शन यात्रा-5 उस पवित्र सिंधु नदी के दर्शन जहा पनपी सिंधु सभ्यता

 25 जून 2023 रविवार  


रविवार का दिन सिन्धु दर्शन यात्रा समिति ने सिन्धु पूजन उत्सव के लिए निर्धारित किया था। सिन्धु घाट होटल से करीब 15 मिकी दूर है। यहां ओपन आडिटोरियम बनाया गया है। सिन्धु स्नान भी किया जा सकता था,लेकिन हमारे जाने के वाहन साढे नौ बजे आए,तब तक हमारा स्नान हो चुका था। आज का भोजन भी कार्यक्रम स्थल पर ही था।  हम सभी होटल से नाश्ता करके निकले।

सिन्धु दर्शन यात्रा-4 खतरों और परेशानियों के तीन दिन

  25 जून 2023 रविवार (रात 00.41) 

होटल अशुर रेसीडेन्सी लेह(लद्दाख) 


 कैलेण्डर की तारीख बदलकर 25 जून हो चुकी है। हमारे इस होटल में हर कोई सौ चुका है। मैं डायरी लिख रहा हूं।  पिछली बार मैने डायरी 22 जून को सुबह 3.45 पर लिखी थी। तब से लेकर अभी तक डायरी मेरे पास नहीं थी। पिछले तीन दिनों की घटनाएं बडी ही रोमांचक और विचित्र  थी। मजेदार यहां तक कि मेरे पास डायरी भी नहीं थी। आज डायरी मेरे पास आई और मैने लिखना शुरु किया।

सिन्धु दर्शन यात्रा-3 हिमाचल में भी विराजे है बर्फानी अमरनाथ

20 जून 2023 मंगलवार (रात 10.15) 

 जेसिका होटल मनाली (हिप्र)


  इस  वक्त हम भोजन करके जेसिका होटल के कमरे में लौट चुके है और सोने की तैयारी में है। कल सुबह 9 बजे हमे निकलना है।  कल हम यहां से केलांग जाएंगे और परसो केलांग से लेह जाएंगे।  अब बात कल की। 


कल शाम करीब 4 बजे हम सैनी धर्मशाला से गूजर धर्मशाला लौट आए थे। हमे कहा गया था कि शाम पांच बजे यात्रा के  शुभारंभ का कार्यक्रम होगा। हमने तय किया था,कि 5 नहीं 6  से साढे छ: बजे के बीच सैनी धर्मशाला पंहुचेगे।  हम पौने सात बजे अपना लगेज पैक करके गूजर धर्मशाला के कमरे से नीचे उतरे और एक इ रिक्शा  पकड कर सैनी धर्मशाला पंहुचे। 

सिन्धु दर्शन यात्रा-2 यहाँ आज भी गूंजते है गीता उपदेशक श्रीकृष्ण के स्वर

 18 जून 2023 रविवार (प्रात:10.30) 

गूजर धर्मशाला कुरुक्षेत्र   


इस वक्त मैं स्नान करके तैयार हो चुका हूं।वैदेही अब स्नान करने जा रही है। कल चुनिन्दा सिन्धु दर्शन यात्री यहां पंहुचे थे,लेकिन आज बडी संख्या में यात्री आ चुके है,जो हमारे आस पास के कमरो में ठहरे है। आज हम कुरुक्षेत्र के अन्य दर्शनीय स्थल देखेंगे। 

यात्रा वृत्तांत 42 सिन्धु दर्शन यात्रा-1 देश का इकलौता स्थान लेह जहा बहती है पवित्र सिंधु नदी

 यात्रा वृत्तांत 42 

  (हिमाचल,लद्दाख कश्मीर यात्रा) 16 जून 2013 से 03 जुलाई 2023  


17 जून 2023 शनिवार (प्रात: 8.25)

 खजुराहो कुरुक्षेत्र एक्सप्रेस कोच न. एस-2  


हजरत निजामुद्दीन से हम इस ट्रेन में सवार हुए है और ये ट्रेन कुरुक्षेत्र के लिए चल पडी है। हम दोपहर तक कुरुक्षेत्र पंहुचेंगे,जहां से वास्तविक सिन्धु दर्शन यात्रा प्रारंभ होगी।  हमारी ये यात्रा कल ही यानी 16 जून को शुरु हो गई थी। बीती रात मैं और वैदेही एकता नगर ह.निजामुद्दीन सुपरफास्ट ट्रेन में सवार हुए थे। ट्रेन आधे घण्टे की देरी से 9.30 पर रतलाम से चली और आज सुबह 6.00 बजे ह.निजामुद्दीन पंहुची थी।  

Friday, March 31, 2023

रतलाम अयोध्या यात्रा-3 / 34 सीढिया चढ़ कर होंगे रामलला के दर्शन


  15 जनवरी 2022 रविवार (दोपहर 2.30)
जानकी महल अयोध्या

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इस वक्त जानकी महल के मंच पर गुरुदेव नर्मदानन्द जी की राश्ट्र गौरव पदयात्रा का समापन समारोह अमृत मंथन का कार्यक्रम चल रहा है। आज सुबह से जबर्दस्त ठण्ड है और मंच के सामने लगी कुर्सियों पर बैठने से ठिठुरन हो रही है। इधर बगल में अलाव जल रहा है और मैैं अलाव की गर्मी से खुद को गर्म कर रहा हूं।

Monday, March 6, 2023

रतलाम अयोध्या यात्रा-2/ आधी रात तक कार्यक्रम की रुपरेखा बनाने की मशक्कत


 14 जनवरी 2022 (रात 11.55) शनिवार 
जानकी महल अयोध्या

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तारीख बदलने में अब कुछ ही मिनटों की देर है। मैैं जानकी महल के अपने कमरे में आज तक की न्यूज सुनते हुए आज का घटनाक्रम लिख रहा हूं। घोटीकर जी भी मेरे साथ न्यूज सुन रहे है। हमने अपनी रात की राष्ट्रीय व्यवस्था किसी तरह जुटा ही ली है और इसी वजह से मैैं ये डायरी लिख पा रहा हूं।

Monday, February 20, 2023

यात्रा वृत्तांत 41 रतलाम अयोध्या यात्रा-1 भगवान का बुलावा और 24 घंटो का सफर


 14 जनवरी 2022 शनिवार (रात 8.10)
जानकी महल अयोध्या


एक बार फिर अयोध्या में। इस समय अयोध्या में आए हुए 15 घण्टे गुजर चुके है। अयोध्या की ये यात्रा बिलकुल अचानक हुई। वैसे तो कई महीनों पहले इसी समय इसी कार्यक्रम में अयोध्या आने का कार्यक्रम तय था,लेकिन जैसे जैसे अयोध्या यात्रा की तारीख नजदीक आई,यहां आने का मन कम होता गया था और आखिर में यहां आने की योजना पूरी तरह रद्द हो गई थी। लेकिन फिर बिलकुल अंतिम समय पर यहां आना तय हुआ। भगवान श्री राम का बुलावा था,इसलिए आना ही पडा। तो इस यात्रा पर मैैं और राजेश घोटीकर साथ आए हैैं।

Tuesday, October 11, 2022

मणिमहेश यात्रा-7-/मन्दसौर में स्वागत के साथ घर वापसी

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02 सितम्बर 2022 शुक्रवार (रात 11.00)

जयपुर के पास किसी होटल में

इस वक्त राते के ग्यारह बज चुके है। हम लोग आज सुबह निकले तो कुछ देरी हो चुकी थी। हम लोग सुबह दस बजे होटल से निकल पाए थे। 

मणि महेश यात्रा-6-/मिनी स्विटजरलैण्ड कहलाने वाले खज्जियार की एक रात...

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..31 अगस्त 2022 बुधवार (गणेश चतुर्थी) रात 9.30

फारेस्ट रेस्ट हाउस,खज्जियार

इस वक्त मैैं भारत के मिनी स्विटजरलैण्ड कहे जाने वाले खज्जियार में सबसे शानदार लोकेशन पर बने फारेस्ट रेस्ट हाउस में रुका हुआ हूं। रात्रि भोजन हो चुका है और अब सोने की तैयारी है।

मणिमहेश यात्रा-5-/ शरीर तोडने वाली यात्रा की समाप्ति के बाद दिखा मणि का चमत्कार.

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30 अगस्त मंगलवार (शाम 8.35)

संजय होटल भरमौर

इस वक्त रात के साढे आठ बज चुके है? हम लोग भरमौर के संजय होटल में भोजन कर चुके है और सोने की तैयारी में है। आशुतोष और प्रकाश बगल के कमरे में सौ चुके है। हमारे कमरे में दशरथ जी गहरी नींद में जा चुके है। डा.राव को अभी नींद नहीं आ रही है। मैैं डायरी के साथ हूं।

मणिमहेश यात्रा-4-बारिश भी बर्फबारी भी,फिर भी हो गए मणिमहेश के दर्शन

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29 अगस्त 2022 सोमवार (शाम 5.55) 

डल झील  मणि महेश

हम इस वक्त मणि महेश कैलास की डल झील के पास में एक टेण्ट में रुके है। मेरे तीन साथी डा.राव,आशुतोष और प्रकाश खच्चरों पर सवार होकर यहां आए हैैंं। मैैं और दशरथ जी पैदल यहां पंहुचे है।

मणि महेश यात्रा-3 - तेज बारिश की फिसलन और दम निकालने वाली खडी चढाई

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28 अगस्त 2022 रविवार   रात 9.54

नाईट कैम्प धन्छो

 इस वक्त हम धन्छो में रात गुजारने के लिए रुके है। मेरे सारे साथी सौ चुके है। अब मैैं डायरी के साथ हूं। हमें कल सुबह जल्दी यहां से आगे बढ जाना है। हम पांच में से तीन साथी कल घोडों पर सवार होकर यहां पंहुचे थे। मैैं और दशरथ जी हमने पैदल ही चला तय किया है।

मणि महेश यात्रा-2/ विदेशों जैसे खुबसूरत एक्सप्रेस वे से हिमाचल में प्रवेश

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26 अगस्त 2022 शुक्रवार (रात 11.45)

होटल अवतार पैलेस- जालन्धर पठानकोट रोड

इस वक्त हम जालन्धर से निकल कर पठानकोट के रास्ते में इस अवतार पैलेस होटल में ठहरे हैैं। 

आज सुबह आलू पराठे और सब्जी पुडी का नाश्ता करके हम जयपुर से करीब सौ किमी पहले स्थित नीलम होटल से निकले थे। आज दिन भर हमें गाडी में ही चलना था। जयपुर शहर को बाहर छोडते हुए रोहतक होते हुए हरियाणा से गुजरते हुए लुधियाना जालन्धर के रास्ते पर थे। सुबह दबा के नाश्ता किया था। जयपुर से अम्बाला के बीच अब शानदार अम्बाला एक्सप्रेस वे बन चुका है।

यात्रा वृत्तान्त-40/ मणि महेश कैलास यात्रा - जहां मणि करती है महेश की पूजा

 हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले की भरमौर तहसील में स्थित है पंचकैलास में एक कैलास मणि महेश। मणिमहेश कैलास चमत्कारिक पर्वत है,जहां न सिर्फ पर्वत पर शिवलिंग और नन्दी इत्यादि स्पष्ट दृष्टिगोचर होते है बल्कि यदि भाग्य हो तो पर्वत की पूजा करती मणि भी दिखाई दे सकती है। मणि महेश पर्वत ही इतना चमत्कारिक है कि यदि भाग्य में ना हो तो पूरा पर्वत ही अदृश्य हो जाता है। मणिमहेश की यात्रा साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी से राधाष्टमी के बीच होती है। मणिमहेश के दर्शन के लिए डल झील तक जाना अत्यन्त कठिन और दुर्गम है। यह यात्रा हमने 25 अगस्त 2022 से 03 सितम्बर 2022 के बीच की थी।

Sunday, September 11, 2022

लोनावाला पूणे यात्रा-4 जंहा बचपन बीता शिवाजी महाराज का,जंहा कटी शाइस्ता खां की उंगलिया


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 31 मई 2022 मंगलवार (प्रात: 8.30)

पूणे


इस यात्रा का आज अंतिम दिन है। पिछले तीन दिन मैने और वैदेही ने पूणे में गुजारे है। 

29 की सुबह हम मलवली में थे जहां से 10.20 पर पूणे की लोकल थी। कमलेश को उसके भाई निमिल के पास चिंचवड जाना था। हम लोकल में सवार हुए। पूणे आखरी स्टेशन था। हम पूणे दोपहर 12 बजे पंहुचे। यहां सुरक्षा(मनु) के घर पंहुच कर भोजन किया। कुछ वक्त रुक कर शाम को पूणेके हाण्डेवाडी रोड इलाके में डा.रवीन्द्र कोठारी (रवि काका) के घर पंहुचे। वहां दो तीन घण्टे गुजारे। कोठारी घराने का पूरा इतिहास मैने मोबाइल से पीडीएफ फार्मेट में मोबाइल में सेव किया। इसे अब मेरे ब्लाग पर लगाना है।

लोनावाला पूणे यात्रा-3 शिवलिंग के आकार का पर्वत और खंडाला घाट की गहराइया

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 28 मई 2022 शनिवार(सुबह 7.15)

यूथ होस्टल्स मलवली


आज कैम्प का आखरी दिन है। कल सुबह अल्पाहार के बाद यहां से रवानगी होगी। आज का दिन हम लोनावाला,खण्डाला की लोकल साईट सीइंग करेंगे।


अब कुछ बातें इस क्षेत्र की। मलवली जहां हम रुके हुए है,यहां से चारों तरफ सह्यïाद्री के पहाड नजर आते है। मलवली और लोनावाला इन पहाडों के बीच मैदानी इलाका है। यहां पूरे वक्त ठण्डी हवाएं चलती रहती है।

लोनावाला पूणे यात्रा-2 आसमान से बाते करता शिवाजी का लौहगढ़ और गुफाये जो मै देख न सका

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26 मई 2022 गुरुवार (सुबह 7.00)

यूथ होस्टल मलवली


फैमिली कैम्प का आज पहला दिन है। आज से तीन दिनों तक हम इस इलाके का भ्रमण करेंगे। सुबह 6.00 बजे उठकर फ्रैश होकर इस वक्त हम चाय पी चुके है। आगले आधे घण्टे में स्नानादि से निवृत्त होकर नाश्ता करेंगे।

जिस परिसर में हम रुके है,यह सम्पर्क बालग्र्राम कहलाता है।  सम्पर्क यानी सोशल एक्शन फार मेनपावर

यात्रा वृत्तान्त 39 लोनावाला पूणे यात्रा-1 शिवाजी पार्क के साथ सिद्धेश्वर के दर्शन

 (24 मई 2022 से 1 जून 2022)


 शिवाजी पार्क के साथ सिद्धेश्वर के दर्शन 

24 मई 2022 मंगलवार (रात 9.05)

एस-2 कोच इन्दौर दौन्ड एक्सप्रेस 22944


इस वक्त हमारी ट्रेन पूणे के रास्ते पर दौडी जा रही है।


हमारी इस पारिवारिक यात्रा में,मै,मेरे साथ वैदेही,कमलेश पाण्डेय,श्रीमती रचना,अवनी और अदिता शामिल है। यह यात्रा करीब एक महीने पहले तय हुई थी। कमलेश की इच्छा थी कि हम जबलपुर की तरफ जाएं,लेकिन वहाम जबर्दस्त गर्मी थी। इसलिए मैने यूथ होस्टल्स के प्रौग्र्राम देखे।

Tuesday, June 7, 2022

कोठारी घराने का इतिहास

 कहते है कि किसी भी व्यक्ति को कम से कम अपनी सात पीढियों की जानकारी होना चाहिए। तभी उसे अपना और अपने परिवार का वास्तविक परिचय मिल पाता है। अगर देश के गैर हिन्दू खास तौर पर मुस्लिमों में यह परम्परा चालू हो जाए,तो अस्सी प्रतिशत से अधिक मुसलमान ये जान जाएंगे कि वे वास्तव में सनातनी थे और उनके पूर्वजों को मार मार के मुसलमान बनाया गया था। वे इस्लाम में स्वेच्छा से नहीं आए बल्कि उन्हे प्रताडित करके मौत का डर दिखा के मुसलमान बनाया गया था। आज के मुसलमानों को यह बात समझ में आ जाए,तो भारत की मुस्लिम समस्या समाप्त हो सकती है।

Pindari Glacier trekking 3 - cheeltha mai trek & return to Kharkiya

Pindari Glacier trekking-2 Tough Trek to Dhakuri

Pindari Glacier Trekking-1 Ratlam to Lohar khet

Hemkund Sahib Trekking-2 (Govindghat to Ghanghriya)

Hemkund Sahib Trekking-1 (Govindghat to Ghanghriya)

Thursday, May 12, 2022

काफनी पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा-7

 पीताम्बरा पीठ के दर्शन के साथ घर वापसी


03 सितम्बर 2021 शुक्रवार(सुबह 8.15)

होटल मस्कट इन,उन्नाव (उप्र)


कल लगातार चलते ही रहे थे। घर पंहुचने तक अब लगातार चलना ही है। लेकिन कल समय ज्यादा हो गया था,इसलिए अयोध्या के बारे में कम लिख पाया। अब अयोध्या की सूरत पूरी तरह बदल गई है। जैसी अयोध्या में हम थे,उसका अयोध्या का तो कहीं अता पता ही नहीं है। लखनऊ से अयोध्या का शानदार फोरलेन एनएचएआई का है। फैजाबाद को बायपास कर दिया गया है। हम रोजाना दो से तीन बार जानकीघाट से रामजन्मभूमि तक जाते थे,सारे रास्ते मालूम थे,लेकिन अब मुख्य सड़क थोडी सी पहचान में आ पाई। 

काफनी पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा-6

 29 सालों के बाद अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि दर्शन


02 सितम्बर 2021 गुरुवार (सुबह 6.45)

होटल संजय पैलेस सीतापुर


कल सुबह डीनापानी के टीआरएच में सब्जी पुडी का नाश्ता करते हुए यह तय हुआ ति मुक्तेश्वर जाने की बजाय अयोध्या श्री रामजन्मभूमि के दर्शन करते हुए लौटा जाए। हांलाकि अयोध्या जाने में 500 किमी की यात्रा बढ रही थी। डीनापानी से अयोध्या लगभग 550 किमी दूर थी,और वहां से मन्दसौर या रतलाम 1000 किमी। इस तरह कुल दूरी 1500किमी हो रही थी,जबकि डीनापानी से सीधे रतलाम जाते तो यह दूरी 1000 किमी ही थी। लेकिन सारे लोग अयोध्या जाने को अड गए।

काफनी पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा-5


 कठिन चढाई के बाद चीलठा माई के दर्शन


31 अगस्त 2021 मंगलवार (सुबह 9.50)

TRH धाकुडी


अभी अभी हम चीलठा माई मन्दिर का दर्शन करके लौटे हैैं और नाश्ते का इंतजार कर रहे हैैं। 


कल बनाई योजना के मुताबिक मैैं तो सुबह चार बजे ही उठ गया था। कमरे में ठण्ड कम ही थी। उठकर अपने नित्यकर्म से निवृत्त हुआ। करीब पौने पांच बजे दशरथ जी को आवाज देकर उठाया। आशुतोष भी उठ गया। आज अनिल ने चीलठा माई जाने से साफ इंकार कर दिया।

काफनी पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा-4




 स्वर्ग सा शानदार नजारा धाकुडी का....


30 अगस्त 2021 सोमवार (सुबह 7.40)

TRH लोहारखेत


हम सभी तैयार हो चुके है,और नाश्ते का इंतजार कर रहे हैैं। सुबह करीब साढे पांच पर उठा था। मौसम एकदम साफ था। कुछ ही देर में धूप भी आ गई थी। मुझे लगा था कि अब हम पैदल जा सकते है। लेकिन बाकी के लोगों का मन जीप से जाने का था। जीप से जाने में धाकुडी पंहुचने के लिए केवल तीन किमी चलना पडता। तो कुल मिलाकर जीप से ही जाने का तय हुआ।

काफनी पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा-3



 तूफानी बारिश में कच्चे संकरे रास्तों पर जीप का खतरनाक सफर....


29 अगस्त 2021 रविवार (शाम 7.45)

TRH लोहारखेत


इस समय हम काफनी और पिण्डारी ग्लैसियर ट्रेकिंग के शुरुआती पडाव लोहारखेत में पंहुचे हैैं। यहां टीआरएच में कमरे मिल गए हैैं। भोजन की तैयारी हो रही है। हमे पता चला है कि कि खाती से द्वाली के बीच का रास्ता अभी बन्द है। पिण्डारी और काफनी ग्लेसियर का रास्ता द्वाली से होकर ही जाता है। यदि द्वाली नहीं जा पाए तो ग्लैसियर तक जाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता।

काफनी पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा-2

 होटल में भूले महंगी घडी......


28 अगस्त 2021 शनिवार रात 9.44

होटल ग्र्रीन वैली,भुजिया हाट

(काठगोदाम नैनीताल रोड)


इस समय हम लोग भोजन भी कर चुके है और जल्दी ही सौ जाने की तैयारी है,क्योंकि कल सुबह जल्दी,हो सके तो सुबह छ: बजे निकल जाना है और अल्मोडा पंहुच जाना है।


सुबह एक समौसा और खाना था,लेकिन आशुतोष ने समौसे को टोटली रिजेक्ट कर दिया,इसलिए फिर हरि(अली)गढ से निकल पडे। रास्ता मुराद नगर से होकर काठगोदाम था। मुराद नगर करीब 150 किमी है। दशरथ जी गाडी चला रहे थे। कहने को तो ये नेशनल हाईवे है,लेकिन टू लेन है। सड़क बढिया बनी हुई थी। चलते रहे। अब नाश्ते की बजाय सीधे भोजन करने की इच्छा थी। भूख लगने लगी थी,धमाल मचाने लगी थी।

यात्रा वृत्तान्त 38 रतलाम काफनी पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा

यात्रा वृत्तान्त 38 

कोरोना के लगातार लाकडाउन से घरों में बन्द रहकर हम सभी बेहद परेशान हो चुके थे। सारे साथी चाहते थे कि जल्दी से जल्दी घरों से निकल कर पहाडों पर पंहुच जाएं। आमतौर पर ट्रेकींग के लिए सितम्बर का महीना ठीक रहता है,जब सारे रास्ते खुल जाते है और बर्फ भी पिघल जाती है। लेकिन कोरोना की मारामारी से परेशान हम लोग जल्दबाजी में सितम्बर से पहले अगस्त में ही पहाडों के लिए चल पडे थे। इस बार हमारा लक्ष्य था  उत्तराखण्ड के कुमाऊं क्षेत्र में घूमना और इसके लिए हमने चुना था काफनी और पिण्डारी ग्लैसिरयर की ट्रेकिंग को। यह यात्रा 26 अगस्त 2021 से शुरु हो कर 4 सितम्बर को समाप्त हुई। इस यात्रा में हमने कई धार्मिक स्थानों के दर्शनों का भी लाभ लिया। यात्रा के दौरान हम मेहन्दीपुर बालाजी,कृष्ण जन्मस्थान मथुरा,गोकुल,वृन्दावन,श्री राम जन्मभूमि अयोध्या और पीताम्बरा माई दतिया के दर्शन कर आए।  

Friday, February 25, 2022

रतलाम- इतिहास के झरोखे से : कुलिश

 शहर के विख्यात शिक्षाविद,साहित्यकार,कवि और प्रखर वक्ता रहे स्व.भंवरलाल भाटी ( 15 अप्रैल 1926- 14 मार्च 2010) की एक और पहचान ईतिहासकार की भी थी। स्व.श्री भाटी
ने वर्ष 1995 में दैनिक भास्कर के लिए रतलाम नगर का ईतिहास अपनी विशीष्ट शैली में लिखा था। यह रोचक स्तंभ स्व.भाटी ने कुलिश के उपनाम से लिखा था। आलेख,कविता इत्यादि स्व.श्री भाटी कुलिश के उपनाम से ही लिखा करते थे। रतलाम-इतिहास के झरोखे से शीर्षक से स्व.श्री भाटी के इस स्तंभ में रतलाम की स्थापना से लगाकर आधुनिक रतलाम बनने तक का पूरा इतिहास अत्यन्त ही रोचक शैली में लिखा है। पिछले कई ïवर्षों से स्व.श्री भाटी द्वारा रचित यह इतिहास उपलब्ध नहीं हो पा रहा था,लेकिन स्व.श्री भाटी के स्नेहपात्र रहे श्री हरीश व्यास ने इसे सहेज कर रखा था। स्व.श्री भाटी द्वारा लिखित इस इतिहास को डिजीटल फार्म में सुरक्षित करने का सुअवसर श्री व्यास के सौजन्य से प्राप्त हुआ है।

Sunday, February 13, 2022

हिजाब प्रकरण-खत्म नहीं होंगे,अब बढते जाएंगे इस तरह के विवाद


 -तुषार कोठारी


कर्नाटक के उडुपी में एक स्कूल से शुरु हुए हिजाब विवाद की आग अब देश के कई कोनों तक फैल चुकी है। यहां तक कि मध्यप्रदेश में भी कहीं कहीं इसकी आहट आने लगी है। मामला हाईकोर्ट में है। लेकिन यह मान लेना कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह विवाद थम जाएगा,बिलकुल सही नहीं होगा। वास्तविकता यह है कि देश में अब इस तरह के बेसिरपैर वाले या कहें बेवजह के विवाद अब बढते जाने वाले है। दस मार्च को यदि उत्तर प्रदेश में दोबारा योगी सरकार बन गई तो ऐसे अवांछित विवादों की बाढ आना तय है। विवाद की असल वजह हिजाब या धर्म पर प्रहार नहीं है,बल्कि मोदी विरोधियों के हाथ आया एक नया हथियार है।

Saturday, February 12, 2022

बलात्कार और पाक्सो एक्ट के प्रावधानों में जरुरी है तर्कसंगतता,बेवजह सजा भुगतने को विवश है हजारों युवा

 -तुषार कोठारी


दिल्ली में हुए निर्भया काण्ड के बाद पूरे देश में हुए प्रदर्शनों और मीडीया के लगातार हंगामे के बाद जहां सरकार ने बलात्कार सम्बन्धी कानूनों में कडे प्रावधान किए वहीं बच्चों के साथ होने वाले लैैंगिक अपराधों पर नियंत्रण के लिए देश में पाक्सो (प्रोटेक्शन आफ चिल्र्डन्स फ्राम सैक्सुअल आफेन्स एक्ट) लागू किया गया। दोनो ही घटनाएं वर्ष 2012 में हुई। तब से लेकर दस वर्ष गुजर चुके है। इन दस वर्षों में इन कानूनों के कुछ कठोर और अतार्किक प्रावधानों ने समाज में नई समस्याएं उत्पन्न कर दी है। दस वर्षों के अनुभव का सबक यही है कि इन दोनों कानूनों में तर्कसंगतता लाना आवश्यक हो गया है। पाक्सो एक्ट के अस्तित्व में आने से देश भर में पाक्सो एक्ट के मामलों की बाढ आ गई है और बडी संख्या में नवयुवक जेलों में बन्द है। सबसे दुखद पहलू यह है कि इनमें से बडी संख्या ऐसे युवकों की है जो उस लडकी के बलात्कार की सजा भुगत रहे है,जो उसी के घर में,उस की पत्नी की हैसियत से बच्चों को पाल रही है।

Monday, June 21, 2021

My Article in Swadesh Indore 1 June 2021


 

भारत की संप्रभुता के लिए नया खतरा बनती जा रही है सोशल मीडीया कंपनियां,इन पर लगाम कसना जरुरी

 -तुषार कोठारी


जब नए नए सोशल मीडीया प्लेटफार्म्स की शुरुआत हो रही थी,तब किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन ये प्लेटफार्म्स अपने आपको किसी राष्ट्र से बडे समझने लगेंंगे और किसी देश को चुनौती देने की स्थिति में आ जाएंगे। लेकिन बदकिस्मती से अब यही हो रहा है। ये सोशल मीडीया कंपनियां इतनी बडी हो गई है कि वे बेहिचक भारत जैसे विशाल देश के कानूनो को चुनौती तक देने को तैयार हो गई है।

Thursday, March 18, 2021

अदालतों के सुस्पष्ट आदेशों के बावजूद क्यों नहीं हटाए जाते मस्जिदों के लाउड स्पीकर...?

  - तुषार कोठारी


इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव द्वारा मस्जिदों में सुबह की अजान के लिए लाउड स्पीकर के उपयोग से होने वाली परेशानी का मामला उठाए जाने के बाद से मस्जिदों के लाउड स्पीकर फिर से चर्चाओं में है। इससे पहले भी कई लोग इस मुद्दे को उठाते रहे है। लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि यह समस्या देश के प्रत्येक शहर में है और उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद मस्जिदों के लाउड स्पीकर हटाए क्यों नहीं जा रहे? सरकारों को किस बात का डर है? क्या वजह है कि सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना पिछले सौलह वर्षो से लगातार जारी है।


Monday, December 28, 2020

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-8

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मित्रों से मुलाकात के बाद वापसी का सफर

05 अक्टूबर 2020 सोमवार (दोपहर 2.00)

इ खबरटुडे आफिस रतलाम


मैैं बीती रात करीब एक बजे घर पंहुचा था। हमारी यात्रा का समापन समारोह रविवार को मन्दसौर में हुआ था। रतलाम से प्रकाशराव पंवार और संतोष त्रिपाठी मन्दसौर आ गए थे,जिन्होने मुझे और अनिल को छोडा था।

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-7

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सौलह घण्टों में तेईस किमी की ट्रैकिंग,वो भी खाली पेट

04 अक्टूबर 2020 रविवार (रात 00.52)

ओयो होटल दिल्ली जयपुर हाईवे शहाजहांपुर


इस होटल में हम रात साढे दस बजे पंहुचे थे। कमरे लिए। भोजन किया। अब सोने की तैयारी है। पिछले तीन दिनों से डायरी लिखने का मौका ही नहीं मिला था। लेकिन आज सोने से पहले यात्रा विवरण वहीं से शुरु,जहां छोडा था। उस दिन 2 अक्टूबर की सुबह छ: बजे मै डायरी लिख रहा था कि तभी सब लोग तैयार हो गए। वहीं डायरी बंद करके तुरंत निकल पडे थे। 

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-6

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पंहुच गए हेमकुण्ड साहिब के दर पर

30 सितम्बर 2020 गुरुवार (सुबह 3.30)

होटल देवलोक घांघरिया

 अभी सुबह पांच बजे हमें हेमकुण्ड साहिब की यात्रा शुरु करना है,इसलिए आज सुबह तीन बजे उठ गए हैैं। ताकि यात्रा सही समय पर शुरु कर दे और देर ना हो जाए।

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-5

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गोविन्द घाट से घांघरिया का चुनौती भरा सफर

30 सितम्बर 2020 बुधवार ( दोपहर 3.00 बजे)

होटल देवलोक घांघरिया


इस वक्त हम ग्यारह किमी की बेहद कठिन और खडी चढाई वाला पहाडी रास्ता पार करके घांघरिया आ गए हैैं।

 आज सुबह हमने छ: बजे निकलने का तय किया था,लेकिन कमरे से निकलते निकलते साढे छ: बज गए थे। कमरे से निकल कर सबसे पहले बरसात से बचाव के लिए पोचू किराये पर लिए।  यहां सौ रु. किराये में पोचू मिल जाते है,लेकिन इसके लिए पहले तीन सौ रु. एडवान्स जमा कराना पडते हैैं।  हमने तीन पोचू लिए। अनिल अपनी बरसाती लेकर आया था।

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-4

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बद्रीनाथ के दर्शन, तप्त कुण्ड पर कोरोना का असर

29 सितम्बर 2020 मंगलवार (रात10.15)

होटल दुर्गा पैलेस गोविन्द घाट

 इस वक्त हम गोविन्दघाट गुरुद्वारे के नजदीक इस होटल में रुके हैैं और सुबह छ: बजे हेमकुण्ड के लिए निकलने की योजना है।  

दोपहर को हम सडक़ के जाम में फंसे थे। दोपहर पौने एक बजे जाम खुला और हम आगे बढे। हम करीब दो बीस पर जोशीमठ पंहुच गए।

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-3

ब्रेड की दो स्लाईस से चार लोगों की भूख मिटाने की कोशिश

28 सितम्बर 2020 सोमवार (रात11.00)

होटल पुष्पदीप ग्र्राण्ड रुद्रप्रयाग


हम रुद्र प्रयाग पंहुच चुके है। जगजीत भाई ने पूरे दिन हमारी चिंता की। जगजीत भाई ने ही बताया कि हमें रुद्रप्रयाग में ही रुकना चाहिए। होटल की व्यवस्था भी उन्होने ही की। हम यहां शाम सात बजे पुहुचे थे। अब भोजन करके सोने की तैयारी में है। सुबह बडी जल्दी छ: बजे यहां से निकल जाने की इच्छा है।

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-2

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गाडी खराब,सेंसर की तलाश और गंगा आरती

26 सितम्बर 2020 शनिवार(रात10.02)
होटल शिवमूर्ति  हरिद्वार

आखिरकार कोरोना टेस्ट कराने के 96 घण्टे पहले हम उत्तराखण्ड में प्रवेश कर गए। इस वक्त हम हरिद्वार के स्टेशनरोड पर होटल ग्र्राण्ड शिवमूर्ति में सोने की तैयारी कर रहें है।  

सुबह जयपुर से करीब 20-25 किमी आगे पराठों का नाश्ता करके निकले थे। गाडी स्टार्ट हुई। मनीष गाडी चला रहा था। उसने कहा कि गाडी का एकाध सेंसर गडबड कर रहा है। जब रतलाम से चले थे,तभी से गाडी का स्पीडोमीटर बन्द पडा था। डेशबोर्ड पर मीटर में इसका संकेत भी मिल रहा था।

हेमकुण्ड साहिब यात्रा-1

 यात्रा वृत्तान्त-37 हेमकुण्ड साहिब यात्रा

(25 सितम्बर 2020 से 4 अक्टूबर 2020)

 अनोखी यात्रा की अनोखी शुरुआत

25-26 सितम्बर 2020 (शुक्र-शनि) रात 12.24

पण्डित होटल जयपुर दिल्ली हाई वे


आज सुबह 9.45 पर अनिल अपनी गाडी से मेरे घर पंहुचा था और मैं जल्दी ही उसकी गाडी में सवार हो गया था। इस तरह हम इस यात्रा के लिए निकले थे।

 ये यात्रा कई मायनों में अनोखी साबित हो रही है। कोरोना लाक डाउन के असर से डरे हुए हम सारे मित्र पिछली 27 जुलाई को निकले थे पचमढी के लिए। घूमघाम कर वापस आ गए। तब चर्चा हुई कि हम हर सितम्बर में हिमालय जाते है,तो इस बार भी जाना चाहिए।

Thursday, December 10, 2020

संशोधनों के लिखित प्रस्तावों के बाद भी,कृषि कानूनों का विरोध-भ्रम में कौन है आन्दोलनकारी किसान या केन्द्र सरकार...?

 -तुषार कोठारी



 केन्द्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों में संशोधन के लिखित प्रस्ताव दिए जाने और आन्दोलनकारी पंजाब के किसानों द्वारा इन प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिए जाने से अब यह निर्विवाद रुप से स्पष्ट हो गया है कि राजधानी की सीमाओं पर कब्जा जमाए बैठे प्रदर्शनकारियों को किसानों के हित की कोई चिंता नहीं है,बल्कि उनका एकसूत्रीय एजेण्डा किसी ना किसी तरह हालात को बिगाड कर रखना और केन्द्र सरकार को बदनाम करना ही है।


Monday, September 21, 2020

पचमढी यात्रा-4 (समापन)

 अनुभवी ट्रेकर से मुलाकात

3 अगस्त 2020 सोमवार,(रक्षाबन्धन)

इ खबरटुडे आफिस (शाम 6.00 बजे)

यात्रा तो 31 जुलाई को ही रतलाम पंहुचकर समाप्त हो गई थी। लेकिन डायरी मलय के बैग में चली गई थी,इसलिए कहानी पूरी नहीं हो पाई। अब डायरी हाथ में आई है,तो कहानी पूरी कर रहा हूं। 

तो,हम 31 जुलाई को पचमढी से रतलाम के लिए निकलने की तैयारी में थे। हमने नौ बजे निकलने का तय किया था,लेकिन हम नौ की बजाय दस बजे होटल से निकले और गाडी में सवार हुए। नाश्ता करना था। दशरथ जी ने कहा कि यहीं करते हैं,मैने कहा कि आगे जाकर करते हैं। पचमढी से पिपरिया तक का रास्ता तो टाइगर रिजर्व के भीतर ही है,इसलिए रास्ते में कोई ढाबा नहीं था।

पचमढी यात्रा-3

  बी फाल नहीं डचेस फाल जाएंगे........


30 जुलाई 2020 गुरुवार (सुबह 8.15)

होटल खालसा लेक व्यू

पचमढी के प्रसिध्द बी फाल,अप्सरा विहार और पाण्डव गुफा पर हम अब तक नहीं गए हैं। बी फाल और अप्सरा विहार जाने के लिए जिप्सी करना होगी और वन विभाग का परमिट भी लेना पडेगा। होटल वाले ने बीती रात एक जिप्सी वाले को भेज दिया था। साढे इक्कीस सौ रु. मे वह हमें दिनभर घुमाएगा। इसमे से ग्यारह सौ रु. वनविभाग के परमित के लगेंगे और एक हजार पचास रु.जिप्सी का किराया। सीजन में जिप्सी वाले दो से चार हजार रु.तक वसूल लेते है। लेकिन अभी कोरोना के चलते यहाम पर्यटक नदारद है,इसलिए सबकुछ सत्ता है। जिप्सी वाला सुबह साढे नौ पर आएगा। तब तक हमें तैयार होना है। सारे लोग तैयार होने की तैयारी में है।

पचमढी यात्रा-2

 गाडी की छत पर बन्दरों का कब्जा 


29 जुलाई 2020 बुधवार (शाम 7.20)

होटल खालसा लेक व्यू

पचमढी के प्रमुख स्थानों को पैरों से नाप कर और करीब 18 किमी की ट्रोकिंग करके हम इसी वक्त होटल में लौटे हैं। हम बुरी तरह थक चुके हैं।

 हमारी आज की यात्रा चौरागढ के ट्रैक से शुरु हुई थी। करीब साढे ग्यारह बजे हमने पंजाबी ढाबे में आलू और पनीर पराठे का भोजन जैसा नाश्ता किया। नाश्ते के बाद हम चौरागढ के लिए निकल पडे। चौरागढ का रास्ता महादेर गुफा से ही आगे है। महादेव गुफा यहां से करीब नौ किमी दूर है। बीच में एक पहाड पार करना पडता है। इस पहाड का रास्ता एक सौ अस्सी डिग्री के मोड वाला सर्पिला रास्ता है।

यात्रा वृत्तान्त-36 पचमढी

 यहीं नहाई थी लिरिल वाली लडकी.....

(27 जुलाई 2020 से 31 जुलाई 2020)


27 जुलाई 2020 सोमवार (रात 9.20)

पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस,होशंगाबाद


पिछली यात्रा 29 दिसम्बर 2019 को शुरु हुई थी और 4 जनवरी 2020 को समाप्त हुई थी। वह जैसलमेर की यात्रा थी। 4 जनवरी 2020 के बाद आज लगभग 7 महीनों के बाद हम यात्रा पर निकल पाए हैं।

 इस समय मैं होशंगाबाद के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हूं,और मेरे साथ वकील साथी दशरथ पाटीदार,प्रकाश राव पंवार,सैलाना से अनिल मेहता और भांजा मलय सोनटक्के भी हैं।

 हमारी यह यात्रा आज दोपहर साढे ग्यारह बजे रतलाम से शुरु हुई थी और हमारी योजना पचमढी जाकर वहां कुछ दिन गुजारने की है।

Friday, September 18, 2020

भारत-चीन विवाद: भारत के लिए समस्याएं सुलझाने का स्वर्णिम अवसर,अब जरुरी है सैन्य विकल्प

 -तुषार कोठारी


 आमतौर पर कोई भी समझदार या बुध्दिजीवी कभी भी युध्द की हिमायत नहीं करता। लेकिन यह ऐतिहासिक और वैश्विक सच्चाई है कि दुनिया का इतिहास युध्दों का ही इतिहास है। विश्व की अधिकांश समस्याओं का निराकरण भी युध्दों के माध्यम से ही हुआ है। शांति के पक्ष मे आप चाहे जितनी दलीलें दे लें लेकिन कठोर वास्तविकता तो यही है कि समस्याओं का निराकरण बातचीत की बजाय युध्दों से ही हुआ है। कहने सुनने में युध्द का विरोध और शांति की हिमायत अच्छा लगता है,लेकिन वास्तविकता को नकारा नहीं जा सकता इसलिए आज दुनिया का हर देश मजबूत से मजबूत सेना और साजो सामान रखने का पक्षधर है।

Thursday, June 25, 2020

चीन से सीमा विवाद और मोदी के अंध विरोधियों का विधवा विलाप

-तुषार कोठारी

स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद नरेन्द्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री है जिन्हे देश में सर्वाधिक प्रेम और सर्वाधिक घृणा दोनों ही मिले हैैं। उनके समर्थकों की तादाद लगातार बढती रही,तो उनके विरोधियों की घृणा भी उसी परिमाण में बढी। हांलाकि विरोधियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है,लेकिन उनकी घृणा जरुर बढती जा रही है। विरोध जताने वाले,मोदी के समर्थकों को तो अंधभक्त कहते रहे,लेकिन विरोध करते करते वे स्वयं कब अंध विरोधी हो गए उन्हे पता ही नहीं चला। चीन से चल रहे सीमा विवाद में भी यही तथ्य सामने आ रहे हैैं।

Monday, June 8, 2020

गांधीसागर बर्ड्स सर्वे-3

चट्टानों पर आराम फरमाता घडियाल

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2 फरवरी 2020

सुबह करीब छ: बजे उठे और सात बजे तक गांधीसागर में 8 न. पर स्थित एफआरओ के निवास परिसर में पंहुच गए। राजेश यहीं रुका हुआ था। बोटिंग के लिए यहीं से जाना था। वन विभाग ने करीब पन्द्रह लोगों को बोटिंग कराने की व्यवस्था की थी,ताकि जलीय पक्षियों को भी गिना जा सके। मछली पकडने वाली एक मोटर बोट में सारे बर्ड वाचर्स सवार हुए। यह बोट बांध के नजदीक से चली तो चौरासी गढ तक पंहुची।

गांधीसागर बर्ड्स सर्वे-2

तालाब पर परिन्दों की फोटोग्राफी

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1 फरवरी दोपहर 3.45
बेसला कैम्प,गांधीसागर
इस वक्त हम बेसला के वन चौकी परिक्षेत्र सहायक के घर पर रुके हुए हैं और शाम की बर्ड्स वाचिंग के लिए जाने को तैयार है। हमारे दो साथी आशुतोष पण्डित जी स्नान कर चुके है और प्रत्यूष स्नान करने गया हुआ है। दोनो ही उज्जैन के हैं और फोटोग्राफर है। आशुतोष जी बर्डिंग करते हैं और उन्हे इस विषय का अच्छा ज्ञान है।
आज की सुबह मैं साढे छ: पर उठ गया था। जहां हम रुके हैं वहां टायलेट बना हुआ है,लेकिन दरवाजे ठीक से नहीं लगते। हमें कोई फर्क नहीं पडता।

गांधीसागर बर्ड्स सर्वे-1

गांधीसागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में परिन्दों के साथ गुजारे वो दो दिन


(31 जनवरी 2020 से 2 फरवरी 2020) गांधीसागर अभ्यारण्य

01 फरवरी 2020 शनिवार (रात 11.30)
बेसला कैम्प(रामपुरा के समीप)
इस वक्त हम,मैं और अनिल गांधीसागर बांध से 25 किमी पहले रामपुरा से 13 किमी आगे,बैसला गांव में वन विभाग के डिप्टी रेंजर के सरकारी निवास पर रुके हुए हैं। इस वक्त हम अनिल की नई गाडी के भीतर बैठे है। मैं अगली सीट पर बैठ कर डायरी लिख रहा हूं,अनिल पिछली सीट पर बैठ कर बातें कर रहा हैं। बातचीत करने के बाद अब मैं डायरी लिख रहा हूं।
 हमारी यह यात्रा करीब दो महीने पहले तय हो गई थी,जब राजेश घोटीकर ने गांधीसागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में बर्ड्स सर्वे होने की जानकारी दी थी। मैने तो हाथोहाथ रजिस्ट्रेशन करवा लिया था।

Friday, May 1, 2020

जैसलमेर डेजर्ट सफारी-4

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झीलों के शहर में गुजरा एक दिन 


3 जनवरी 2020

आज की सुबह जल्दी हुई। ठण्ड कम थी,इसलिए मैं साढे सात पर उठ गया। नाश्ते में पोहे बने थे। हिमांशु ने प्रस्ताव रखा कि बिना स्नान के जल्दी निकलते है,ताकि जल्दी उदयपुर पंहुच जाएं। लेकिन यह प्रस्ताव दमदार नहीं था। स्नान नहीं करते तो आधा घण्टा बचता,लेकिन स्नान कर लेते तो अच्छा फील होता। तैयार होते होते सवा दस बज गए। लेकिन इससे हिमांशु नाराज हो गया।

जैसलमेर डेजर्ट सफारी-3

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कुलधारा के उजड़े गांव,किले और बॉर्डर की रक्षा करती तनोट माता 


2 जनवरी 2020 बुधवार (सुबह 10.15)

व्हायएचएआई कैम्प जैसलमेर
इस वक्त सुबह के सारे काम निपटा कर अब स्नान की तैयारी है। कडाही में पानी गर्म हो रहा है। पानी गर्म हो जाएगा तभी स्नान हो पाएगा। कैम्प के वाहन से घूमने जाने वाले निकल चुके हैं। हमें अपनी गाडी से जाना है,इसलिए हम देर से भी जाए तो भी चलेगा। पकौडे चाय का नाश्ता हो चुका है। आलू की सब्जी और पूडी का लंच पैक किया जा चुका है।

जैसलमेर डेजर्ट सफारी-2

स्वर्ण नगरी का जैसल दुर्ग और पाकिस्तान की करारी हार का म्यूज़ियम 


31 दिसंबर 2019 (दोपहर 3.00)

व्हाचएचएआई कैम्प जैसलमेर
इस वक्त हम भोजन करके अपने टेण्ट में बैठे है। टेण्ट में बहुत सारी रेत घुस आई थी। अभी टेण्ट की सफाई की है। सुबह जबर्दस्त ठण्ड थी। हड्डियां जमा देने वाली। इसलिए जागरण से लेकर सारे काम बेहद धीमे हुए। काफी हिम्मत के बाद करीब साढे दस बजे स्नान किया। हम लोग करीब सवा ग्यारह बजे तैयार होकर कैम्प से निकल पाए।

नेपाल यात्रा-7 पशुपतिनाथ के दर्शनों के साथ नेपाल से वापसी

 प्रारंभ से पढने के लिए यहां क्लिक करें 16 नवंबर 2024 विश्व विख्यात पशुपतिनाथ मन्दिर होटल के बिलकुल सामने ही था। सुबह सवेरे जल्दी उठकर स्नान...